देवेंद्र सिंह कुशवाह के निस्वार्थ प्रेम की कहानी, किडनी दान कर बेटी की जिंदगी बचाने का किया था संघर्ष
ग्वालियर के सेवानिवृत्त डीएसपी देवेंद्र सिंह कुशवाह ने बेटी खुशबू की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान की थी। लंबे संघर्ष के बाद भी बेटी की जिंदगी नहीं बच सकी।
बेटी की जिंदगी बचाने के लिए एक पिता अपना अंग तक दान कर दे और वर्षों तक उसके इलाज के लिए हरसंभव प्रयास करता रहे, इससे बड़ा त्याग शायद ही इस दुनिया में कोई और हो सकता है। ग्वालियर के सेवानिवृत्त डीएसपी देवेंद्र सिंह कुशवाह और उनकी दिवंगत बेटी खुशबू की यह हृदय विदारक कहानी एक पिता के असीम और निस्वार्थ प्रेम की सबसे अनूठी मिसाल है, जो हर किसी की आंखें नम कर देती है।
🩺 बिना किसी संकोच के पिता ने दिया किडनी दान करने का फैसला
जब करीब 60 वर्ष की आयु में डॉक्टरों ने खुशबू की गंभीर स्थिति को देखते हुए किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) की तत्काल आवश्यकता बताई, तो देवेंद्र सिंह कुशवाह ने एक पल का भी संकोच नहीं किया। उन्होंने अपनी ममता और फर्ज निभाते हुए अपनी ही किडनी बेटी को देने का साहसिक फैसला लिया, ताकि उनकी बेटी एक सामान्य जीवन जी सके और मुस्कुरा सके।
🔄 इलाज के लिए लगातार संघर्ष और भोपाल तक दौड़, पर नहीं बच सकी जान
किडनी प्रत्यारोपण के बाद कुछ समय तक तो खुशबू की तबीयत ठीक-ठाक रही, जिससे परिवार में एक नई उम्मीद जगी थी। लेकिन वक्त के साथ उसकी सेहत फिर से बिगड़ने लगी। बेटी को बचाने की जिद लिए यह पिता ग्वालियर से लेकर भोपाल और देश के अन्य बड़े शहरों तक डॉक्टरों के चक्कर काटते रहे। उन्होंने इलाज की व्यवस्था और परामर्श में कोई कमी नहीं छोड़ी, परंतु लाइलाज बीमारी के आगे आखिरकार बेटी की सांसे थम गईं। यह मार्मिक कहानी भले ही दुःखद अंत पर खत्म हुई हो, लेकिन एक पिता का यह महान त्याग हमेशा अमर रहेगा।
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