समाजसेवियों की अनूठी पहल, गरीब बच्चों का बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का सपना हुआ साकार

रतलाम में बालगृह और झुग्गी बस्तियों के 300 बच्चों के लिए मल्टीप्लेक्स में 'हनुमान अंश' फिल्म का विशेष शो आयोजित किया गया। बच्चों ने पहली बार बड़े पर्दे पर फिल्म देखी।

Sep 02, 2026 - 16:43
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समाजसेवियों की अनूठी पहल, गरीब बच्चों का बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का सपना हुआ साकार

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली पहल सामने आई है, जहाँ सामाजिक कार्यकर्ताओं और एक सिनेमाघर संचालक ने मिलकर समाज के उपेक्षित और गरीब बच्चों के लिए मल्टीप्लेक्स में फिल्म 'हनुमान अंश' का एक विशेष शो आयोजित किया। बालगृह, झुग्गी बस्तियों और निराश्रित परिवारों से ताल्लुक रखने वाले करीब 300 बच्चों ने जब पहली बार किसी बड़े मल्टीप्लेक्स के अंदर कदम रखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आयोजकों ने बच्चों को सिनेमाघर तक सुरक्षित लाने, फिल्म दिखाने के साथ-साथ उनके बेहतरीन लंच और नाश्ते की भी पूरी व्यवस्था की थी।

🍿 नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म, गायत्री सिनेमा के संचालक ने उठाया सराहनीय कदम

इन दिनों आध्यात्मिक और धार्मिक गुरु नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' खासी चर्चा में है। इसी प्रेरणादाई फिल्म को रतलाम के प्रसिद्ध गायत्री सिनेमाघर में विशेष तौर पर इन बच्चों के लिए चलाया गया। सिनेमाघर के संचालक पीयूष जैन ने बताया कि सामान्य तौर पर संपन्न परिवारों के बच्चे तो अक्सर मल्टीप्लेक्स में फिल्में देखने जाते हैं, लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिनके बच्चों ने कभी बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का सुख नहीं अनुभव किया है। इसी असमानता को पाटने और सभी बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से इस विशेष और निःशुल्क शो की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसमें बच्चों को पूरी मेहमाननवाजी के साथ फिल्म दिखाई गई।

✨ पहली बार बड़े पर्दे पर फिल्म देखकर झूम उठे बच्चे, बोले—कभी सपने में भी नहीं सोचा था

सिनेमा हॉल की बड़ी स्क्रीन, चारों तरफ गूंजती सराउंड साउंड और रंग-बिरंगी लाइट्स के बीच जब बच्चों ने फिल्म देखना शुरू किया, तो उनकी उत्सुकता देखते ही बनती थी। कई बच्चे ऐसे थे जिन्होंने अपने पूरे जीवन में पहली बार किसी टॉकीज या मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखी थी। फिल्म देखने के बाद बच्चों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह बेहद अद्भुत लगा और उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे कभी इस तरह बड़े पर्दे पर बैठकर फिल्म देख सकेंगे। इस आयोजन से जुड़े समाजसेवी विशाल शर्मा ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग के बच्चों में खुशियाँ बाँटना और उन्हें समानता का अहसास कराना है, ताकि वे भी खुद को किसी से कम न समझें।

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