कच्चे तेल की कीमतों में 10% का उछाल, क्या महंगे हो जाएंगे पेट्रोल और डीजल? जानिए क्या है नया अपडेट

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर के करीब पहुंच गया है, जिससे कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है।

Sep 02, 2026 - 17:30
0
कच्चे तेल की कीमतों में 10% का उछाल, क्या महंगे हो जाएंगे पेट्रोल और डीजल? जानिए क्या है नया अपडेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ दिनों से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो खाड़ी देशों के ब्रेंट क्रूड के दाम में हाल ही में लगभग 10 फीसदी तक का इजाफा हुआ है और यह बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गया है। हालांकि पेट्रोलियम कंपनियां अभी इस बढ़े हुए नुकसान को सहन कर रही हैं, लेकिन उनके मन में सबसे बड़ा डर इस बात का है कि यदि क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर के पार निकल गईं, तो उन्हें मजबूरन पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। वर्तमान समय में देश के अधिकांश शहरों में ईंधन के दाम पहले से ही ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।

📉 कंपनियों पर दबाव: डीजल पर हो रहा है 15 रुपए तक का नुकसान, LPG पर भी भारी घाटा

मीडिया रिपोर्ट्स और विश्लेषकों के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल की रेंज तक कच्चे तेल की कीमतों का बोझ उठा सकती हैं और ब्रेक-ईवन (न लाभ-न हानि) की स्थिति में काम कर सकती हैं। हालांकि, ICRA के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में पेट्रोल की बिक्री पर कंपनियों को 5 रुपए प्रति लीटर का मार्जिन मिल रहा है, जबकि डीजल की बिक्री पर 15 रुपए प्रति लीटर का नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बिक्री पर भी कंपनियों को प्रति सिलेंडर करीब 200 रुपए का भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है, जिससे सरकारी खजाने और कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

⚔️ अमेरिका-ईरान तनाव बना मुख्य वजह: लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहने पर ही बढ़ेंगे दाम

कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल के पीछे मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और भू-राजनीतिक हालात हैं। जानकारों का मानना है कि कंपनियां अभी किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं हैं और वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि कच्चे तेल की ये कीमतें आने वाले कई हफ्तों तक 95 से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तभी रिटेल फ्यूल के दाम बढ़ाने पर आधिकारिक रूप से विचार किया जाएगा। फिलहाल कंपनियां वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए हरसंभव एहतियात बरत रही हैं ताकि आम जनता पर एकदम से बड़ा आर्थिक बोझ न पड़े।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User