थर्मल पावर और रिन्यूएबल एनर्जी के बीच संतुलन की समस्या, बैटरी स्टोरेज क्यों है जरूरी?
एम्बर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ट्रांसमिशन और स्टोरेज की कमी के कारण पिछले 15 महीनों में 11 टेरावाट-घंटे सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं हो पाया है।
जब देश में गर्मी अपने चरम पर थी और बिजली की माँग आसमान छू रही थी, तब रात के वक्त एसी और कूलिंग उपकरणों के ज्यादा चलने से पावर सप्लाई में भारी दिक्कतें पेश आई थीं। एक तरफ बिजली की भीषण माँग थी, तो दूसरी तरफ रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को अपना उत्पादन कम करने के निर्देश दिए जा रहे थे। इसकी मुख्य वजह यह थी कि देश के पास ग्रिड की क्षमता से कहीं अधिक क्लीन एनर्जी मौजूद थी, जिसे सुरक्षित रूप से मैनेज करना मुश्किल हो रहा था। ऊर्जा थिंक टैंक 'एम्बर' (Ember) की एक चौंकाने वाली रिसर्च के मुताबिक, पिछले 15 महीनों के दौरान भारत में लगभग 11 टेरावाट-घंटे सौर ऊर्जा का इस्तेमाल ही नहीं किया जा सका, जो इतनी बड़ी मात्रा है कि इससे करीब 1 करोड़ घरों को रोशन किया जा सकता था।
⚡ थर्मल पावर और रिन्यूएबल एनर्जी का असंतुलन: 'कर्टेलमेंट' (कटौती) बनी क्लीन पावर उत्पादन में सबसे बड़ी रुकावट
भारत के पास वर्तमान में 300 गीगावाट से अधिक क्लीन पावर क्षमता मौजूद है, जो देश की कुल बिजली क्षमता का आधे से ज्यादा हिस्सा है। इसके बावजूद देश की एक बहुत बड़ी आबादी को आज भी कोयले से बनी बिजली पर निर्भर रहना पड़ रहा है। विशेषज्ञ इसके पीछे ‘कर्टेलमेंट’ (उत्पादन कटौती) को सबसे बड़ा कारण मानते हैं। जब कोई सोलर या विंड प्लांट बिजली पैदा कर सकता है, लेकिन ग्रिड उसे लेने में असमर्थ होता है, तो मजबूरी में उत्पादन रोकना पड़ता है। एम्बर के विश्लेषक नेश्विन रॉड्रिक्स का कहना है कि दोपहर के समय जब सौर ऊर्जा अपने चरम पर होती है, तब कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट्स के लिए अचानक अपना उत्पादन घटाना बेहद मुश्किल काम साबित होता है।
🔋 बैटरी स्टोरेज ही है एकमात्र समाधान: पश्चिमी राज्यों में सरप्लस प्रोडक्शन, 2032 तक भारी क्षमता की दरकार
वाइब्रेंट एनर्जी के सीईओ विनय पब्बा के अनुसार, उत्पादन रोकने से रिन्यूएबल कंपनियों को सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि उन्हें केवल उसी बिजली का भुगतान मिलता है जो सफलतापूर्वक ग्रिड तक पहुँचती है। पश्चिमी भारत के गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य देश की लगभग 50 फीसदी सौर ऊर्जा का उत्पादन करते हैं, लेकिन दोपहर में पीक आवर्स के दौरान ट्रांसमिशन लाइनें कम पड़ जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी स्टोरेज के बिना सौर ऊर्जा का शत-प्रतिशत उपयोग असंभव है। सरकार को 2032 तक बैटरी स्टोरेज क्षमता को 74 गीगावाट तक पहुँचाने का लक्ष्य पूरा करना होगा, ताकि अतिरिक्त सोलर पावर को सुरक्षित रखकर रात के समय उसका बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)