किसानों को नहीं मिल रहा प्याज की तेजी का पूरा लाभ, बिचौलियों की चांदी, खुदरा बाजार में दाम आसमान पर
रतलाम कृषि उपज मंडी में प्याज की कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। थोक और रिटेल दरों में 18 रुपये तक का अंतर है।
मध्य प्रदेश के मालवांचल स्थित कृषि उपज मंडियों में इन दिनों प्याज के दामों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, मंडियों में बड़ी संख्या में पहुँच रही प्याज की आवक के कारण किसानों को इस तेजी का पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि मंडी में किसानों से थोक भाव में खरीदे जा रहे प्याज और रिटेल दुकानों पर उपभोक्ताओं को बेचे जाने वाले प्याज की कीमतों में 15 से 18 रुपये प्रति किलो तक का बड़ा अंतर सामने आ रहा है। अच्छी गुणवत्ता वाला उत्तम प्याज रतलाम की कृषि उपज मंडी में जहाँ 45 रुपये प्रति किलो तक खरीदा जा रहा है, वहीं आम उपभोक्ताओं को यही प्याज खुदरा बाजार में 55 से 60 रुपये प्रति किलो के भाव से मिल रहा है, जिसका सीधा फायदा किसानों की बजाय बिचौलियों और मध्यस्थ व्यापारियों को मिल रहा है।
📊 थोक और रिटेल बाजार के दामों में क्यों है इतना अंतर? जानकारों और व्यापारियों ने रखी अपनी बात
सामान्य तौर पर थोक और रिटेल बाजार के मूल्य में 5 से 10 रुपये का अंतर होता है, लेकिन रतलाम और आसपास के क्षेत्रों में यह फासला काफी बढ़ गया है। प्याज-लहसुन व्यापार के जानकार निलेश बाफना के अनुसार, सितंबर से नवंबर के बीच नए प्याज की आवक न होने के कारण कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है, लेकिन थोक व रिटेल का यह भारी अंतर बीच के व्यापारियों द्वारा तय किया जाता है और दक्षिण भारत से नए प्याज की आवक शुरू होने तक उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद कम है। वहीं, मंडी व्यापारी प्रदीप शर्मा का कहना है कि 45 रुपये किलो खरीदे गए प्याज पर लेबर, बारदान, मंडी टैक्स और ढुलाई का खर्च जुड़कर वह 50 रुपये तक पड़ जाता है, साथ ही भंडारण के दौरान प्याज के सड़ने और वजन घटने का जोखिम भी खुदरा विक्रेताओं को उठाना पड़ता है।
🚜 उत्पादन कम होने से किसानों के पास सीमित स्टॉक, बेहतर दामों के बावजूद आवक का दबाव बना रहा बाधा
इस सीजन में मालवा क्षेत्र के किसानों को पिछले वर्षों की तुलना में प्याज के कुछ बेहतर दाम जरूर मिल रहे हैं, जिससे किसान संतुष्ट भी हैं, लेकिन इस वर्ष कुल उत्पादन कम होने के कारण अधिकांश किसानों के पास अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज का स्टॉक सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है। स्थानीय किसान पूनम चंद्र चौधरी बताते हैं कि दाम ठीक मिलने के बावजूद जब बड़ी संख्या में प्याज की ट्रॉलियां एक साथ नीलामी के लिए पहुँचती हैं, तो बाजार में मांग और आपूर्ति के संतुलन के कारण कई बार अपेक्षित 50 रुपये के बजाय प्याज 35 से 40 रुपये प्रति किलो के भाव पर ही बिक पाता है।
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