शहडोल 3 साल की बच्ची दुष्कर्म-हत्या मामला, हाईकोर्ट ने आरोपी की फांसी की सजा को 25 साल उम्रकैद में बदला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहडोल में 3 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को बदलते हुए दोषी की फांसी की सजा को 25 साल की उम्रकैद में तब्दील कर दिया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शहडोल जिले में 3 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसके बाद हत्या के सनसनीखेज मामले में निचली अदालत के फैसले में बड़ा बदलाव किया है। हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए आरोपी को दी गई फांसी की सजा को 25 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा, "इंसान की जिंदगी भगवान का अनमोल तोहफा है। तथ्यों, परिस्थितियों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों को मद्देनजर रखते हुए अपीलकर्ता की जान आसानी से नहीं ली जानी चाहिए।"
📜 क्या था पूरा मामला? 1 मार्च 2023 की रात खैरहा थाना क्षेत्र में हुई थी हृदयविदारक घटना
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 1 मार्च 2023 की रात शहडोल जिले के खैरहा थाना अंतर्गत ग्राम छिरहटी में राम नारायण उर्फ भानु धीमर ने अपने पड़ोस की 3 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। घटना के वक्त बच्ची की मां आरोपी की पत्नी के साथ एक विवाह समारोह में शामिल होने गई थी। घर लौटने पर जब मां ने देखा कि बच्ची की नाक से खून बह रहा है और आरोपी शराब के नशे में धुत है, तो उसने विरोध किया। आरोपी ने महिला को धमकी दी थी कि सभी को बताना कि बच्ची पलंग से गिर गई है। इसके बाद परिजन बच्ची को बुढ़ार अस्पताल ले गए, जहाँ से गंभीर हालत के चलते उसे शहडोल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था।
🏛️ निचली अदालत ने माना था 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' केस, हाईकोर्ट ने सुधार की संभावना और अन्य तथ्यों को बनाया आधार
इलाज के दौरान 7 मार्च 2023 को मासूम की मौत हो गई थी, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर की हड्डी टूटने (फ्रैक्चर) तथा यौन हमले की पुष्टि हुई थी, साथ ही आरोपी की डीएनए रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी। इस पर निचली अदालत ने मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) मानते हुए मुख्य आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि साक्ष्य छुपाने के आरोप में उसकी पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार को 4-4 साल की सजा दी थी। हाई कोर्ट में अपील पर सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि मुख्य आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है, उसकी उम्र 32 वर्ष है और उसके सुधार व पुनर्वास की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में नहीं आता, जिसके चलते मौत की सजा को 25 साल की उम्रकैद में बदल दिया गया, जिसमें कोई छूट नहीं मिलेगी। इसके साथ ही साक्ष्य के अभाव में हाईकोर्ट ने आरोपी की पत्नी और उसके दोस्त को बरी कर दिया है।
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