उमरिया के बांधवगढ़ में मानसून सीजन के दौरान गाइड्स की स्पेशल ट्रेनिंग शुरू, पहले बैच ने लिया हिस्सा
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मानसून सीजन के दौरान गाइड्स की स्पेशल ट्रेनिंग शुरू हो गई है। पहले बैच के 29 गाइड्स को वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता का प्रशिक्षण दिया गया।
मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) में इन दिनों मानसून सीजन के चलते कोर जोन में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह बंद हैं, लेकिन इसी अवधि का सदुपयोग करते हुए पार्क प्रबंधन द्वारा गाइड्स के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब नए पर्यटन सीजन की शुरुआत हो, तो पर्यटक बांधवगढ़ पहुँचकर और अधिक बेहतर, अनुशासित और ज्ञानवर्धक तरीके से पार्क का भ्रमण कर सकें। इस कड़ी में आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर के पहले बैच में कुल 29 गाइड्स ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और वन्यजीवों व प्रकृति से जुड़ी बारीकियों को सीखा।
🌿 विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने सिखाई जैव विविधता और वन्यजीवों की बारीकियां, व्यक्तित्व विकास पर भी दिया गया जोर
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 के आगामी पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम का यह पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। इस दो दिवसीय सत्र के दौरान देश-प्रदेश के विशेष विशेषज्ञों द्वारा गाइड्स को बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, दुर्लभ वन्यजीवों, सरीसृपों, पक्षियों, विभिन्न वनस्पतियों, कीटों और वन्यजीवों के प्राकृतिक अनुकूलन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, गाइड्स के संवाद कौशल, व्यक्तित्व विकास (ग्रूमिंग), उनकी मुख्य भूमिका, दायित्वों और जिम्मेदार ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) जैसे अहम विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए ताकि वे पर्यटकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकें।
🌳 मैदानी स्तर पर फील्ड विजिट और प्रकृति व्याख्या के व्यावहारिक पहलुओं से कराए गए परिचित
इस प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन ताला पर्यटन क्षेत्र के भीतर विशेष 'फील्ड विजिट' का आयोजन किया गया, जिसमें सभी 29 प्रतिभागियों को वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनकी गतिविधियों का मैदानी स्तर पर सीधा अवलोकन कराया गया। साथ ही, उन्हें 'प्रकृति व्याख्या' (Nature Interpretation) के व्यावहारिक पहलुओं से भी परिचित कराया गया। प्रशिक्षण में शामिल सभी गाइड्स ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे अपने व्यावसायिक कौशल और ज्ञान को बढ़ाने की दिशा में बेहद उपयोगी बताया। पार्क प्रबंधन का यह अनूठा प्रयास न केवल गाइड्स को पर्यटकों को केवल बाघ दिखाने तक सीमित रखेगा, बल्कि उन्हें बांधवगढ़ के इतिहास, प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के एक प्रभावी व्याख्याकार के रूप में भी पूरी तरह सक्षम बनाएगा।
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