5 साल से भवन का इंतजार कर रहा सरकारी स्कूल, ग्रामीण ने बच्चों के भविष्य के लिए दे रखा है अपना घर
छिंदवाड़ा के पातालकोट में सीएम के दौरे के बाद भी सरकारी स्कूल भवन विहीन है। चिमटीपुर के बच्चे पिछले 5 साल से कच्चे मकान में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्यपाल द्वारा पातालकोट की वादियों और आदिवासी संस्कृति की भले ही खूब सराहना की गई हो, लेकिन यहां की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। पातालकोट के ग्राम तालाबढाना स्थित एकीकृत शाला चिमटीपुर की प्राथमिक शाला आज भी एक पक्के स्कूल भवन का इंतजार कर रही है। स्कूल के पास खुद का भवन न होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों को एक कच्चे और असुविधाजनक छप्पर वाले मकान में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, और बारिश के मौसम में यह मुश्किलें और अधिक बढ़ जाती हैं।
🏡 ग्रामीण गोलू भारती ने बच्चों की पढ़ाई के लिए निःशुल्क दिया अपना घर, शिक्षा अधिकारी बोले—जल्द शुरू होगा निर्माण
ग्रामीण गोलू भारती ने बताया कि स्कूल की यह समस्या 5 साल पुरानी है। पूर्व में जब स्कूल की पुरानी बिल्डिंग गिर गई थी, तब बच्चों का भविष्य बचाने के लिए उन्होंने अपना घर स्कूल संचालन के लिए दे दिया, जिसका वे न तो कोई किराया लेते हैं और न ही मेंटेनेंस का पैसा। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी जगदीश प्रसाद इढ़पाचे का कहना है कि नए स्कूल भवन की स्वीकृति मिल चुकी है और बारिश थमते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पगडंडी जैसे कच्चे रास्तों से गुजरकर जंगल के बीच पढ़ने आने वाले इन बच्चों को अब प्रशासनिक वादों के पूरे होने का इंतजार है।
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