निवाड़ी और मऊगंज में सबसे ज्यादा तो अलीराजपुर-धार में सबसे कम बरसे बदरा, जानें पूरी रिपोर्ट
मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के 100 दिन बीतने के बाद भी वर्षा सामान्य से 7 प्रतिशत पीछे है। विंध्य-बुंदेलखंड में जहां अच्छी बारिश हुई, वहीं मालवा-निमाड़ सूखे की चपेट में है।
मानसून सीजन के 100 दिन से अधिक बीत जाने के बावजूद मध्य प्रदेश में कुल वर्षा का आंकड़ा अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। हालांकि विंध्य और बुंदेलखंड के इलाकों में मानसून की मेहरबानी रही है, लेकिन मालवा-निमाड़ क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। मौसम केंद्र के 1 जून से 9 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान प्रदेश में कुल 794.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर यह आंकड़ा 856 मिलीमीटर होना चाहिए था। इस प्रकार पूरे प्रदेश में अब तक 7 प्रतिशत कम पानी बरसा है।
📊 पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में बारिश का अंतर—भोपाल-ग्वालियर में बंपर बरसात, जबकि इंदौर और जबलपुर में कोटे से कम पानी
मौसम विज्ञानी एचएस पांडे के अनुसार, प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में वर्षा सामान्य से 13 प्रतिशत कम (691.9 मिमी) दर्ज की गई है, जबकि पूर्वी इलाकों में स्थिति लगभग सामान्य (1 प्रतिशत कम, 927.1 मिमी) बनी हुई है। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और ग्वालियर में कोटे से अधिक पानी गिरा है, जबकि इंदौर और जबलपुर में स्थिति निराशाजनक रही है। सर्वाधिक वर्षा वाले जिलों में निवाड़ी (62% अधिक) और मऊगंज (58% अधिक) सबसे आगे हैं, वहीं सबसे कम वर्षा वाले जिलों में अलीराजपुर (-55%) और धार (-42%) शामिल हैं। राहत की बात यह है कि 11 सितंबर से एक नया लो प्रेशर सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
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