मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क का भंडाफोड़, बांग्लादेशियों के तार गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़े
मध्य प्रदेश में जाली दस्तावेजों से बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह पर एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई। 70 पासपोर्ट की पुष्टि, पुलिसकर्मियों समेत 15 लोग रडार पर।
भोपाल। मध्य प्रदेश में जाली दस्तावेजों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच कर रही राज्य स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अब तक जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके तार कई राज्यों से जुड़े मिले हैं।
इनमें से नागपुर से पकड़े गए एक आरोपी का पासपोर्ट गुजरात के कच्छ जिले के मथल गांव के पते पर बना पाया गया है। चूंकि कच्छ का क्षेत्र पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है, इसलिए एसटीएफ इस आरोपी 'जाय चौधरी बरूआ' से कड़ाई से पूछताछ कर रही है।
🛕 डबरा के बौद्ध विहार के पते पर बना प्रियान राय का पासपोर्ट, 15 पुलिसकर्मी और कर्मचारी एसटीएफ के रडार पर
वहीं, महाराष्ट्र के उल्लासनगर से गिरफ्तार किए गए आरोपी प्रियान राय का पासपोर्ट ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर जारी किया गया था। एसटीएफ अब सरकारी विभागों के उस पूरे सिस्टम की पड़ताल कर रही है, जो पुलिस सत्यापन से लेकर प्रशासनिक दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल था।
इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट जारी किए गए थे। अब तक की जांच में पुलिस और अन्य विभागों के 15 कर्मचारियों के नाम जांच सूची में शामिल हैं। इनमें ग्वालियर के डबरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला, एचसीएम भूपेंद्र गुर्जर सहित अन्य पुलिसकर्मी और पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी शामिल हैं।
🆔 दतिया, भोपाल, बैतूल और छिंदवाड़ा से बने दर्जनों फर्जी पासपोर्ट: रियाल चौधरी ने बनवाए थे फर्जी पहचान पत्र
एसटीएफ की जांच के अनुसार, अब तक मध्य प्रदेश के दतिया (डबरा) स्थित बौद्ध मठ के पते पर 17, भोपाल के अन्ना नगर स्थित बौद्ध मठ के पते पर 40, बैतूल से 11, तथा छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिले से 1-1 फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला सामने आया है।
एसटीएफ की शुरुआती पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि सभी मामलों में फर्जी तरीके से पहचान संबंधी दस्तावेज आरोपी रियाल चौधरी ने बनवाए थे, जो मूल रूप से असम के कामरूप जिले का रहने वाला है। अन्य जिलों से जारी हुए पासपोर्टों में भी उसकी मुख्य भूमिका होने का संदेह है। एसटीएफ की जांच के दायरे में ग्वालियर, भोपाल, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा और बैतूल सहित कई अन्य जिले भी हैं, जहां आंबेडकर पार्क और बौद्ध विहार के पते पर हाल ही में आए संदिग्ध लोगों के पासपोर्ट बने थे।
🚨 जाली पासपोर्ट की संख्या 200 पार जाने की आशंका, 70 की हो चुकी है पुष्टि
जांच अधिकारियों का अनुमान है कि जाली कागजातों के आधार पर बनाए गए फर्जी पासपोर्टों की कुल संख्या 200 तक पहुंच सकती है। फिलहाल, इन्हीं संदिग्ध पतों पर जारी हुए अन्य पासपोर्टों की गहन जांच जारी है।
स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की अब तक की जांच में ऐसे 70 फर्जी पासपोर्ट की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक अन्य पासपोर्ट अभी भी संदेह के घेरे में हैं और उनकी पड़ताल की जा रही है।
🔍 गुजरात के कच्छ भेजी जाएगी एसटीएफ की टीम, सत्यापन अधिकारियों पर कसेगा शिकंजा
नागपुर से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट गुजरात के सीमावर्ती जिले कच्छ से बनने के कारण एसटीएफ की एक विशेष टीम को वहां भी जांच के लिए भेजा जाएगा।
इसके साथ ही, सत्यापन प्रक्रिया और दस्तावेजी जांच में लापरवाही या संलिप्तता बरतने वाले पुलिस अधिकारियों, पुलिसकर्मियों तथा अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों की विस्तृत सूची तैयार कर ली गई है, जिन पर जल्द ही वैधानिक शिकंजा कसा जाएगा।
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