11 दिन के इंतजार और 10 लाख रुपये किराए के बाद मिली राहुल गांधी के कार्यक्रम को मंजूरी
इंदौर में राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के मैदान का 10 लाख किराया वसूलने पर सियासत। जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, मंत्री सारंग ने कसा तंज।
भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर में प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए इंदौर के रीजनल पार्क के 10 लाख रुपये किराया वसूले जाने पर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि, "राहुल गांधी देश के पहले ऐसे नेता प्रतिपक्ष हैं जो युवाओं के लिए पूर्णतः गैर-राजनीतिक कार्यक्रम कर रहे हैं। इसके बावजूद मोहन यादव सरकार ने मैदान के लिए उनसे 10 लाख रुपये जमा करवाए हैं।"
जीतू पटवारी ने पुरानी राजनीति को याद दिलाते हुए कहा कि, "जब हमारी सरकार होती थी, तब हम पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की सभाओं के लिए न सिर्फ मुफ्त में मैदान उपलब्ध कराते थे, बल्कि उन्हें सुनने भी जाते थे। यही दोनों दलों की सोच का बुनियादी फर्क है। अगर सरकार 10 लाख की जगह 20 लाख रुपये का भी बिल देती, तो भी कांग्रेस कार्यकर्ता उसे चुकाते।"
🎙️ मंत्री विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर तंज: 'मध्य प्रदेश आकर स्क्रिप्टेड भाषण और देश तोड़ने वाली भाषा न बोलें'
दूसरी ओर, मैदान की मंजूरी और 10 लाख के किराए पर छिड़े इस विवाद के बीच कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा, "हमने राहुल गांधी के कार्यक्रम की अनुमति को कभी नहीं रोका था और न ही कोई उनके मध्य प्रदेश दौरे का विरोध कर रहा है।"
मंत्री सारंग ने तीखा हमला बोलते हुए आगे कहा, "दिक्कत यह है कि राहुल गांधी में गंभीरता की कमी है। मैं उनसे यही अनुरोध करूंगा कि वे मध्य प्रदेश आकर कोई भी स्क्रिप्टेड भाषण न दें। देश को तोड़ने और समाज में विभेद पैदा करने वाली भाषा का प्रयोग उन्हें नहीं करना चाहिए। उन्हें परिपक्वता और गंभीरता दिखानी चाहिए, ताकि उनके भाषण से हिंदुस्तान को कोई नुकसान न पहुंचे।"
⏳ 11 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मिली कार्यक्रम की मंजूरी: 29 अगस्त को मांगी गई थी स्टेडियम की अनुमति
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी के इस विशेष संवाद कार्यक्रम के लिए 29 अगस्त को सबसे पहले इंदौर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम की अनुमति मांगी थी। शुरुआत में यह कार्यक्रम 12 सितंबर को आयोजित होना तय हुआ था।
हालांकि, जिला प्रशासन और नगर निगम ने मैदान को पहले से 'रिजर्व्ड' (आरक्षित) बताकर अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस को मजबूरन कार्यक्रम की तारीख 12 सितंबर से बढ़ाकर 19 सितंबर करनी पड़ी। आखिरकार करीब 11 दिन की लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद 17 सितंबर से 19 सितंबर तक के लिए रीजनल पार्क की मंजूरी मिली, जिसका निर्धारित किराया 10 लाख रुपये तय किया गया है।
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