चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने पर लंदन में रचा गया इतिहास, देखें खास तस्वीरें व रिपोर्ट

लंदन की टेम्स नदी पर पहली बार भव्य 'गंगा आरती' का आयोजन हुआ। चिन्मय मिशन यूके के 75 वर्ष पूरे होने पर 'टोटली थेम्स' उत्सव में भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम दिखा।

Sep 14, 2026 - 16:51
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चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने पर लंदन में रचा गया इतिहास, देखें खास तस्वीरें व रिपोर्ट

भारत की प्रसिद्ध और पवित्र गंगा नदी आरती अब लंदन की टेम्स (Thames) नदी के किनारों तक पहुंच गई है। रविवार को लंदन में भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का एक अनोखा और ऐतिहासिक संगम देखने को मिला।

यहां टेम्स नदी के तट पर पहली बार पारंपरिक विधि-विधान के साथ 'गंगा आरती' का भव्य आयोजन किया गया। यह पहला मौका था जब ब्रिटेन की धरती पर इस स्तर पर नदी आरती का आयोजन हुआ, जिसमें यूके के हिंदू समुदाय और दक्षिण एशियाई प्रवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भारी संख्या में श्रद्धालु और आम नागरिक इस अलौकिक आरती के साक्षी बने।

जानकारी के अनुसार, ‘गंगा आरती ऑन द थेम्स: ए सेरेमनी ऑफ लाइट’ (Ganga Aarti on the Thames: A Ceremony of Light) का आयोजन चिन्मय मिशन यूके द्वारा 'टोटली थेम्स' (Totally Thames) वार्षिक महोत्सव के सहयोग से किया गया था। यह आयोजन चिन्मय मिशन संस्था के स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित वैश्विक समारोहों की एक महत्वपूर्ण कड़ी था।

🕉️ पूरी श्रद्धा व विधि-विधान के साथ संपन्न हुई आरती: प्रकृति, ज्ञान और चेतना का अद्भुत संगम

भारत में गंगा नदी के तटों पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध आरती की भावना को लंदन में भी उसी आध्यात्मिक संदेश और दिव्यता के साथ साकार किया गया।

इस आयोजन की परिकल्पना प्रकृति, ज्ञान और चेतना के जीवनदायी प्रवाह के प्रतीक के रूप में की गई थी। कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने नदी, पर्यावरण और जीवन के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए बहुस्तरीय पीतल के दीप जलाए। संगीत, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

चिन्मय मिशन यूके की निवासी शिक्षिका ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने कहा, "पीढ़ियों से श्रद्धालु गंगा के किनारे एकत्र होकर प्रकृति और जीवन को बनाए रखने वाली हर शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए दीप अर्पित करते आए हैं। टेम्स नदी पर आयोजित इस आरती में भी वही पावन भावना झलकती है, जो विविध पृष्ठभूमि के लोगों को कृतज्ञता, आशा और सामाजिक एकता के साझा सूत्र में बांधती है।"

📖 चिन्मय मिशन के 75 गौरवशाली वर्ष: स्वामी चिन्मयानंद की कालजयी विरासत का जश्न

शिक्षिका श्रीप्रिया चैतन्य ने आगे कहा कि चिन्मय मिशन के लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि शाश्वत ज्ञान के निरंतर प्रवाह का प्रतीक है।

उन्होंने बताया, "हमारे संस्थापक पूज्य स्वामी चिन्मयानंद जी ने अपना संपूर्ण जीवन हिमालय की कंदराओं से निकालकर हिंदू धर्म की महान दार्शनिक परंपरा 'वेदांत' के ज्ञान को आम जनमानस की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने में समर्पित कर दिया। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर, यह आयोजन उस महान दार्शनिक विरासत और विचार का उत्सव है। ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता का यह प्रवाह किसी देश की सीमाओं से बंधा नहीं है।"

🕯️ मां गंगा और प्रकृति के प्रति अटूट आस्था: पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश

चिन्मय मिशन के प्रवक्ता ने बताया कि आरती एक पारंपरिक हिंदू अनुष्ठान है जिसमें बड़े दीप जलाकर प्रार्थनाएं की जाती हैं, भजन गाए जाते हैं और मंत्रोच्चार किया जाता है।

यह आयोजन नदी के प्रति अगाध श्रद्धा और प्रकृति माता के प्रति वैश्विक कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकृति के प्रति सम्मान केवल एक विषय नहीं है, बल्कि यह समारोह स्वयं मां गंगा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का जरिया है, जिन्हें हिंदू संस्कृति में मोक्षदायिनी, जीवनदायी और पालनहार के रूप में पूजा जाता है।

🧹 स्वच्छता और पर्यावरण का रखा गया विशेष ध्यान: पूरी तरह इको-फ्रेंडली रहा समारोह

इस ऐतिहासिक आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता और लंदन के स्थानीय पर्यावरण मानकों का पूर्ण रूप से पालन किया गया।

टेम्स नदी के किनारे आयोजित यह पूरी आरती जमीन (रिवरबैंक) पर ही संपन्न की गई। समारोह से संबंधित कोई भी सामग्री, दीप, फूल या अपशिष्ट टेम्स नदी के पानी में न तो प्रवाहित किया गया, न रखा गया और न ही छोड़ा गया।

मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रिटेन भर के हिंदू संगठनों, आध्यात्मिक संस्थानों और विभिन्न समुदायों के वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश-हिंदू समुदाय के लिए एक साझा सांस्कृतिक उत्सव मंच प्रदान करना और सभी पृष्ठभूमि के लोगों को प्रकृति की रक्षा के लिए प्रेरित करना था।

🏛️ 1951 में हुई थी चिन्मय मिशन की स्थापना: दुनिया भर के 350 से अधिक केंद्रों में जारी है सेवा

चिन्मय मिशन एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन है, जिसकी स्थापना 1951 में पूज्य स्वामी चिन्मयानंद की दिव्य दृष्टि और वेदांत दर्शन के आधार पर हुई थी।

यह संस्था व्यक्तिगत रूपांतरण और आध्यात्मिक जागृति के लिए समर्पित है। आज दुनिया भर में चिन्मय मिशन के 350 से अधिक क्रियाशील केंद्र हैं, जो आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक गतिविधियों, विद्यालयों, अस्पतालों और जनसेवा के कार्यों में संलग्न हैं। यूके (UK) में चिन्मय मिशन बच्चों, युवाओं, परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई शैक्षणिक व नैतिक कार्यक्रम संचालित करता है।

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