भोजशाला के बाद धार की लाट मस्जिद को लेकर तनाव, 'वराह मार्च' से पहले हिंदू संगठन के कई नेता हिरासत में

धार की लाट मस्जिद (विजय मंदिर) को लेकर विवाद गहराया। 'वराह मार्च' से पहले पुलिस ने सनातन प्रहरी नेताओं को हिरासत में लिया, ASI परिसर बंद। पढ़ें ताजा अपडेट।

Sep 15, 2026 - 13:03
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भोजशाला के बाद धार की लाट मस्जिद को लेकर तनाव, 'वराह मार्च' से पहले हिंदू संगठन के कई नेता हिरासत में

धार। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर मानने का निर्णय दिए जाने के बाद अब शहर के एक और धार्मिक स्थल को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव के हालात निर्मित हो गए हैं।

सनातन प्रहरी समिति ने धार स्थित लाट मस्जिद को परमारकालीन 'मार्तंड प्रसाद' यानी प्राचीन 'विजय मंदिर' होने का दावा किया है। इसी मुद्दे को लेकर धार शहर में 15 सितंबर को 'वराह मार्च' का आयोजन प्रस्तावित किया गया था। वहीं दूसरी ओर, इसी दिन दूसरे समुदाय ने भी वाहन रैली निकालने की अनुमति मांगी थी।

सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाया है।

🚨 हिंदू संगठन के प्रमुख नेता हिरासत में: पुलिस और आशीष बसु के बीच हुई तीखी नोकझोंक

'वराह मार्च बाइक रैली' की अनुमति निरस्त किए जाने के बावजूद संभावित जमावड़े और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने जिलेभर में सनातन प्रहरी संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सोमवार रात से ही हिरासत में लेना शुरू कर दिया।

अचानक शुरू हुई इस धरपकड़ की कार्रवाई से क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल बन गया। सोमवार देर रात पुलिस कार्रवाई के दौरान सनातन प्रहरी के प्रमुख नेता आशीष बसु और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई।

आशीष बसु ने पुलिस की इस निरोधात्मक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, "पहले आप मुझे यह बताइए कि मुझे कहां ले जाया जा रहा है? कहीं रास्ते में आप मेरा एनकाउंटर तो नहीं कर देंगे?"

🛡️ सुरक्षा के मद्देनजर निरोधात्मक कार्रवाई: ASI ने ऐतिहासिक परिसर पर लगाया ताला

मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विजय डावर ने बताया, "प्रस्तावित वराह मार्च के कारण जिले में कानून-व्यवस्था बिगड़ने और शांति भंग होने की प्रबल आशंका थी। इसी सुरक्षा जोखिम को ध्यान में रखते हुए पुलिस द्वारा यह निरोधात्मक कार्रवाई की गई है।"

पुलिस ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से संगठन के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों और नजरबंद केंद्रों में भेजा है।

उधर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एहतियात के तौर पर विवादित ऐतिहासिक स्थल को मंगलवार के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है और मुख्य द्वार पर सुरक्षा का कड़ा घेरा तैयार कर दिया है।

🚁 शहर में 1000 पुलिस जवान तैनात: ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से रखी जा रही पैनी नजर

धार शहर में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 800 से 1000 पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

प्रस्तावित मार्च के रास्तों और शहर के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों, हाईराइज इमारतों पर तैनात जवानों और ड्रोन कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।

प्रशासन की इस अभूतपूर्व सख्ती का सीधा असर शहर की सामान्य गतिविधियों पर देखने को मिला है। मुख्य चौराहों और संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर की गई भारी नाकेबंदी के बीच शांति बनाए रखना पुलिस-प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

📜 क्या है धार का लाट मस्जिद विवाद? जानें दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे

धार शहर में स्थित इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। हिंदू संगठन 'सनातन प्रहरी समिति' का दावा है कि धार की लाट मस्जिद असल में परमार राजवंश के समय का प्राचीन 'विजय मंदिर' है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे ऐतिहासिक लाट मस्जिद मानता आया है।

क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तनाव और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने 'वराह मार्च' की अनुमति देने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके साथ ही शांति भंग होने के खतरे को टालने के लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों की प्रस्तावित रैलियों की अनुमतियां रद्द कर दी गई हैं।

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