अमेरिका ने अंतरिक्ष में तैनात किए हथियार, जानिए क्या है चीन और रूस से जुड़ा खतरा
अमेरिका ने अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने का किया ऐलान। चीन और रूस के बढ़ते अंतरिक्ष खतरों के बीच हथियारों की होड़ हुई तेज।
अंतरिक्ष पर अपनी बादशाहत को लेकर दुनिया के कई देशों में संघर्ष तेज होने के आसार बन गए हैं. अमेरिका ने ऐलान किया है कि उसने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर दिए हैं. अमेरिकी वायुसेना के सेक्रेटरी ट्रॉय मींक ने बताया कि अमेरिकी सेना की सुरक्षा के लिए इनका इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका के रूप में पहली बार किसी देश ने अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती की बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है. अमेरिकी वायुसेना के सेक्रेटरी ट्रॉय मींक ने कहा, हम जहां भी हों, उभरते खतरों की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा. यही वजह है कि अमेरिका ने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर दिए हैं.”
🛰️ 2. अंतरिक्ष के लिए बढ़ती जा रही हथियारों की होड़, चीन और रूस की अंतरिक्ष क्षमताओं से अमेरिका चिंतित
ट्रॉय मींक ने मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में एयर एंड स्पेस फोर्सेस एसोसिएशन की ओर से आयोजित सालाना आयोजन ‘एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस’ में कहा, “आज हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हम जहां भी हों, उभरते खतरों की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा.” उन्होंने आगे कहा, “यही वजह है कि अमेरिका के पास अब अंतरिक्ष में ऐसे हथियार हैं जो दुश्मन की कार्रवाई के खिलाफ संयुक्त सेना की रक्षा करने में सक्षम हैं.” हालांकि मींक ने किस तरह के हथियारों की तैनाती की गई, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी और जब उनसे इस मामले में विस्तार से बताने के लिए कहा गया, तो उन्होंने और जानकारी देने से मना कर दिया. साथ ही उनके बयान से यह साफ भी नहीं हो सका है कि इन हथियारों को अंतरिक्ष में कब भेजा गया था.
🇷🇺 3. रूस और चीन पर अंतरिक्ष में परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप, सीएनएन की रिपोर्ट का दावा
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस स्पेस फोर्स (US Space Force) की तारीफ की है, जिसे उन्होंने 2019 में वायु सेना के हिस्से के रूप में तैयार किया था. इसे अमेरिका की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया था, खासकर ऐसे समय में जब दुनियाभर में हथियारों की होड़ बढ़ रही है और चीन तथा रूस की ओर से अंतरिक्ष में अमेरिका के दबदबे को लगातार चुनौती दी जा रही है. सीएनएन के मुताबिक, यूएस स्पेस फोर्स की वेबसाइट पर दावा किया गया है, “चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति के तहत अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताएं विकसित और संचालित करता है. तो वहीं रूस अंतरिक्ष को युद्ध का मैदान समझता है और उसका मानना है कि भविष्य के संघर्षों में अंतरिक्ष पर वर्चस्व एक निर्णायक कारक होगा.” अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बार-बार आगाह किया है कि ये दोनों देश नई आक्रामक अंतरिक्ष क्षमताओं की टेस्टिंग कर रहे हैं.
⚠️ 4. अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती से जुड़े कानूनी पहलू और वैश्विक चिंताएं
सीएनएन का कहना है कि उसने करीब 2 साल पहले 2024 में यह रिपोर्ट तैयार की, जिसमें अमेरिकी खुफिया जानकारी से पता चलता है कि रूस ने अंतरिक्ष-आधारित परमाणु हथियार विकसित करने की भी कोशिश की है. यह हथियार एक विशाल ऊर्जा तरंग का उपयोग करेगा, जिसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) कहा जाता है, ताकि बड़ी संख्या में कमर्शियल और सरकारी सैटेलाइट्स को बेकार किया जा सके. दूसरी ओर मॉस्को ने इस तरह के दावे का खंडन किया है. हालांकि अंतरिक्ष में ऐसे हथियार के व्यापक और विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, उन सैटेलाइट्स को खराब करना जिन पर दुनिया मौसम का पूर्वानुमान लगाने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए काफी हद तक निर्भर रहती है, या यहां तक कि ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम को भी प्रभावित किया जा सकता है. मींक ने कहा, “यह बहुत जरूरी है कि हम न सिर्फ हवा में बल्कि अंतरिक्ष में भी अपना दबदबा बनाए रखें.”
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