'5 साल पूरे, पद छोड़ें राज्यपाल मंगूभाई पटेल', जानिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर केंद्र सरकार की दलील
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल के 5 साल का कार्यकाल पूरा होने पर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हुई। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल के कार्यकाल को लेकर जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एम.ए. खान द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि राज्यपाल मंगूभाई पटेल का 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में संवैधानिक परंपराओं के अनुसार उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
📜 याचिकाकर्ता की मांग: '5 साल पूरे होने पर राज्यपाल छोड़ें पद, नए चयन तक चीफ जस्टिस संभालें प्रभार'
इस याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस आर.एन. पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ (Bench) में हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय रायजादा ने संविधान के अनुच्छेद 153 और 156 का हवाला देते हुए कहा, "राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उनका सामान्य कार्यकाल 5 वर्षों का होता है।"
याचिका में मांग की गई है कि 5 वर्ष पूरे हो जाने पर राज्यपाल को पद से हट जाना चाहिए, जैसा कि पहले भी कई मामलों में देखा गया है। जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद का प्रभार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) को सौंपा जाना चाहिए।
🏛️ केंद्र सरकार का पक्ष: 'नया राज्यपाल आने तक पद पर बने रहने का संवैधानिक प्रावधान'
इस मामले में भारत सरकार की ओर से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने केंद्र का पक्ष रखते हुए अलग दलील दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 156 के तहत राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष की अवधि के लिए तय होता है, लेकिन उसी अनुच्छेद में यह स्पष्ट प्रावधान है कि राज्यपाल तब तक अपने पद पर बने रह सकते हैं जब तक कि उनका उत्तराधिकारी (नया राज्यपाल) पदभार ग्रहण न कर ले।
अतः केवल 5 वर्ष की अवधि पूरी होने के आधार पर राज्यपाल का पद स्वतः रिक्त नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों की गहन बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
👤 गुजरात की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं मंगूभाई पटेल: जानें उनके राजनीतिक सफर के बारे में
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल का जन्म 1 जून 1944 को गुजरात के नवसारी जिले में हुआ था। उन्होंने गुजरात की प्रादेशिक राजनीति में दशकों तक एक सक्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में काम किया है।
वे गुजरात विधानसभा में नवसारी सीट से 5 बार और गांदेवी सीट से 1 बार विधायक चुने गए। गुजरात सरकार में वे आदिवासी कल्याण मंत्री और बाद में वन एवं पर्यावरण विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे। इसके अतिरिक्त वर्ष 2013 में वे गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष पद पर भी आसीन रहे।
🎖️ जुलाई 2021 में बने थे मध्य प्रदेश के राज्यपाल: 8 जुलाई को ली थी शपथ
तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जुलाई 2021 में मंगूभाई पटेल को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया था। उन्होंने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपने पद की गोपनीयता की शपथ ली थी।
अब देखना होगा कि हाईकोर्ट इस याचिका पर क्या फैसला सुनाता है और 5 साल के कार्यकाल व उत्तराधिकारी के पदभार संभालने संबंधी संवैधानिक प्रावधानों पर क्या टिप्पणी करता है।
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