जबलपुर में सड़कों पर उतरा भारतीय किसान संघ, ट्रैक्टर रैली निकालकर MSP ₹3100 करने की मांग
जबलपुर में भारतीय किसान संघ ने निकाली विशाल ट्रैक्टर रैली। धान का समर्थन मूल्य ₹3100 करने और भावांतर योजना के विरोध में मोहन सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के ही आनुषांगिक संगठन 'भारतीय किसान संघ' (BKS) ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अनाज खरीदी के लिए लागू की गई भावांतर योजना के विरोध में किसान सड़कों पर उतर आए हैं।
किसान संगठन का स्पष्ट कहना है कि भावांतर योजना से किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है, इसलिए वे सरकार से पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही किसानों ने धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर ₹3100 प्रति क्विंटल करने की पुरजोर मांग की है। इसी सिलसिले में जबलपुर में किसानों ने विशाल ट्रैक्टर रैली निकालकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
🌾 धान का समर्थन मूल्य ₹3,100 करने की मांग: कृषि उपज मंडी से घंटाघर तक गूंजे किसानों के नारे
मध्य प्रदेश में भारतीय किसान संघ के आह्वान पर मंगलवार को जबलपुर में एक भव्य ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में सैकड़ों की संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों पर सवार होकर जबलपुर कृषि उपज मंडी परिसर से रवाना हुए।
शहर के मुख्य मार्गो से गुजरते हुए यह रैली जबलपुर के प्रसिद्ध घंटाघर चौक पहुंची। भारतीय किसान संघ के प्रांतीय पदाधिकारी राघवेंद्र पटेल ने बताया, "राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश के किसानों से धान का समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल करने का वादा किया था। लेकिन वर्तमान में सरकार ने समर्थन मूल्य को मात्र ₹2,461 तक ही बढ़ाया है। हमारी मुख्य मांग है कि वादे के अनुसार धान की खरीदी ₹3,100 की दर पर ही की जाए।"
❌ 'भावांतर योजना फ्लॉप, हमें केवल समर्थन मूल्य चाहिए': किसान नेता राघवेंद्र पटेल का तीखा हमला
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने बीते दिनों प्रदेश में भावांतर योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत यदि किसी किसान की कृषि उपज बाजार में समर्थन मूल्य से कम दाम पर बिकती है, तो मूल्य के अंतर की राशि सरकार सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है।
हालांकि, किसान नेता राघवेंद्र पटेल ने इस व्यवस्था को पूरी तरह फ्लॉप करार दिया है। उनका कहना है कि इस योजना से किसानों को कोई वास्तविक लाभ नहीं पहुंच रहा है। किसान भावांतर के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते; वे चाहते हैं कि सरकार उनकी धान, गेहूं, चना सहित सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीदी सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ही करे।
📢 'तहसील से दिल्ली तक शक्ति प्रदर्शन': बीकेएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी का बयान
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी ने रैली के दौरान कहा, "आज का यह कार्यक्रम किसानों का एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन था। इस प्रकार का शक्ति प्रदर्शन पूरे मध्य प्रदेश में तहसील स्तर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक आयोजित किया जाता है, ताकि सरकार के समक्ष किसान अपनी चट्टानी एकजुटता दिखा सकें।"
उन्होंने आगे कहा कि किसानों के कई ज्वलंत मुद्दे राज्य सरकार के समक्ष लंबित हैं, जबकि कुछ नीतिगत विषयों पर केंद्र सरकार से भी मतभेद हैं। इसी कारण हर साल किसान संघ इस प्रकार के माध्यम से अपनी बात और मांगें सरकार तक पहुंचाता है।
⚡ बिजली कटौती और खाद संकट से बेहाल मध्य प्रदेश का किसान: नए प्रयोगों पर जताई नाराजगी
रैली में शामिल किसान नेताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश का किसान इस समय केवल फसलों के दाम ही नहीं, बल्कि सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से भी बेहद परेशान है।
इसके अलावा, रबी और खरीफ फसलों के सीजन में खाद (उर्वरक) की कम उपलब्धता और उसके वितरण में शासन द्वारा किए जा रहे नए-नए प्रयोगों व प्रक्रियाओं से भी किसानों को रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान संघ ने चेतावनी दी है कि सरकार को बिजली और खाद जैसी मूलभूत सुविधाओं पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
📊 जीडीपी में 18% योगदान और 46% आबादी निर्भर: कृषि को फायदे का धंधा बनाना वक्त की मांग
भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 18% है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, आज भी भारत की लगभग 46% कार्यशील आबादी अपनी आजीविका और रोजगार के लिए सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है।
हालांकि, पिछले दशकों की तुलना में खेती पर निर्भरता में कुछ कमी आई है, लेकिन अब भी देश की करीब आधी आबादी का जीवन इसी पर टिका हुआ है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और कृषि को वास्तव में 'फायदे का धंधा' बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी वर्तमान नीतियों व योजनाओं में व्यावहारिक बदलाव करने ही होंगे।
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