Sehore News: जिला अस्पताल के बाहर पिता का धरना; हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए नहीं मिल रहा था महंगा इंजेक्शन

सीहोर में हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के पिता ने किया अस्पताल के बाहर धरना। 22 हजार के इंजेक्शन के लिए भटकना पड़ा मजबूर पिता को। जानें क्या है पूरा मामला।

Jun 23, 2026 - 14:36
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Sehore News: जिला अस्पताल के बाहर पिता का धरना; हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए नहीं मिल रहा था महंगा इंजेक्शन

सीहोर। जिला अस्पताल के बाहर उस समय भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जब एक पिता अपने दो बीमार बच्चों के इलाज की गुहार लेकर धरने पर बैठ गया। पीड़ित श्रवण कुमार मेवाड़ा के दोनों बेटे (12 वर्ष और 8 वर्ष) गंभीर आनुवांशिक रोग 'हीमोफीलिया' से जूझ रहे हैं। पिता का आरोप है कि आर्थिक तंगी के कारण वे 22,700 रुपये का महंगा 'फेक्टोसेल VIII' इंजेक्शन खरीद पाने में असमर्थ हैं, और प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकारी मदद समय पर नहीं मिल रही थी।

💉 हीमोफीलिया और इंजेक्शन की अनिवार्यता

हीमोफीलिया एक ऐसा रक्त विकार है जिसमें शरीर में खून का थक्का नहीं जम पाता। इस बीमारी में मामूली चोट भी जानलेवा हो सकती है, जिसके लिए क्लॉटिंग फैक्टर VIII का इंजेक्शन लगाना अनिवार्य होता है। यह इंजेक्शन इतना महंगा होता है और इसे फ्रीजर में रखना पड़ता है, जिसके कारण आम गरीब परिवार इसे जुटा पाने में लाचार महसूस करते हैं। जिला स्तर पर इन दवाओं की अनुपलब्धता मरीजों के लिए संकट खड़ा कर देती है।

⚖️ प्रदर्शन के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन

धरने की सूचना मिलते ही स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के समर्थन में आगे आए। लोगों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए और तत्काल इलाज मुहैया कराने की मांग की। बढ़ते दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया। सीहोर सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव ने बताया कि यह इंजेक्शन सीहोर और भोपाल के सेंट्रल डिपो में स्टॉक में नहीं था, जो आज ही प्राप्त हुआ है।

✅ भर्ती किए गए बच्चे, जल्द मिलेगा इलाज

डॉ. श्रीवास्तव ने आश्वस्त किया है कि बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है। अस्पताल के स्टोर कीपर को विशेष रूप से भोपाल के जेपी अस्पताल भेजा गया है ताकि जल्द से जल्द जीवन रक्षक इंजेक्शन लाकर बच्चों को लगाया जा सके। प्रशासन के आश्वासन के बाद पिता का प्रदर्शन शांत हुआ है। यह घटना जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों और गरीब मरीजों की लाचारी को उजागर करने वाली है।

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