Rishabh Vanshkar: निवाड़ी के युवा चित्रकार ने बढ़ाया बुंदेलखंड का मान; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऋषभ को किया सम्मानित
निवाड़ी के ऋषभ वंशकार ने राष्ट्रपति भवन में बुंदेली कला का परचम लहराया। आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऋषभ की प्रतिभा को सराहा।
निवाड़ी। बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और चित्रकला को नई पहचान दिलाने का काम निवाड़ी के एक होनहार युवा चित्रकार ऋषभ वंशकार ने किया है। अपनी अद्भुत प्रतिभा के दम पर ऋषभ को राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रतिष्ठित 'आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंस' कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला। 12 दिनों तक चली वर्कशॉप के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न केवल ऋषभ से मुलाकात की, बल्कि उनकी कला और समर्पण की जमकर प्रशंसा भी की।
🌟 12 दिन की वर्कशॉप और राष्ट्रपति से सम्मान
राष्ट्रपति भवन में 3 जून से 15 जून तक आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के 11 चुनिंदा कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। ऋषभ, जो हाल ही में हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, इन 11 कलाकारों में सबसे कम उम्र के थे। राजस्थान, पंजाब, आंध्रप्रदेश और हिमाचल जैसे राज्यों के अनुभवी चित्रकारों के बीच ऋषभ ने बुंदेली शैली की चित्रकला का बखूबी प्रतिनिधित्व किया।
🖌️ संघर्ष से सफलता तक: शौक बना पहचान
ऋषभ वंशकार का सफर बेहद प्रेरणादायक है। निवाड़ी में जूते-चप्पल की छोटी सी दुकान चलाने वाले उनके पिता राजकुमार वंशकार ने बचपन में ही बेटे की कलात्मक रुचि को पहचान लिया था। ऋषभ बताते हैं, "जब मैं चित्रकला का अर्थ भी नहीं जानता था, तब से अभ्यास कर रहा हूं। स्कूल और होमवर्क के बाद दोस्तों के साथ खेलने के बजाय, मैं रोजाना 7-8 घंटे पेंटिंग में बिताता था।" उनके पिता का सहयोग और मार्गदर्शन ही है कि आज ऋषभ ने बुंदेलखंड का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
👤 दिग्गजों ने भी सराहा ऋषभ का हुनर
ऋषभ की चित्रकला के दीवाने केवल राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि कई बड़ी हस्तियां रही हैं। इससे पहले वे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं। दोनों नेताओं ने ऋषभ द्वारा बनाई गई उनकी तस्वीरों की सराहना की थी और उनकी हौसला अफजाई की थी। राहुल गांधी ने तो उनसे बुंदेली चित्रकला की बारीकियों के बारे में विस्तार से चर्चा भी की थी।
👨👦 प्रेरणादायी पितृ-प्रेम
ऋषभ के पिता राजकुमार वंशकार का मानना है कि बच्चों पर अपनी इच्छाएं थोपने के बजाय उनके शौक को निखारना ही सही मार्गदर्शन है। उन्होंने कभी ऋषभ को चित्रकारी करने से नहीं रोका। आज जब उनका बेटा राष्ट्रपति भवन से सम्मानित होकर लौटा है, तो यह पूरा परिवार और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है। ऋषभ की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि मेहनत और लगन सच्ची हो, तो छोटे से कस्बे का कलाकार भी दुनिया में अपनी पहचान बना सकता है।
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