Ratlam News: जनसुनवाई में नई व्यवस्था; आवेदनों की छंटनी के लिए रतलाम प्रशासन ने लागू किया 'कलर कोडिंग' सिस्टम

रतलाम जनसुनवाई में हुआ बदलाव! आवेदनों की छंटनी के लिए अब 'कलर कोडिंग' सिस्टम लागू। जानें पिंक, सफेद और पीली पर्ची का क्या है मतलब और कैसे मिलेगा न्याय।

Jun 23, 2026 - 17:11
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Ratlam News: जनसुनवाई में नई व्यवस्था; आवेदनों की छंटनी के लिए रतलाम प्रशासन ने लागू किया 'कलर कोडिंग' सिस्टम

रतलाम। जिले में हर मंगलवार आयोजित होने वाली जनसुनवाई को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए रतलाम जिला प्रशासन ने एक नई पहल की है। आवेदकों की बढ़ती भीड़ और पुरानी शिकायतों के अंबार को देखते हुए कलेक्टर मिशा सिंह ने 'कलर कोडिंग' सिस्टम लागू किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब हर आवेदन पर एक विशेष रंग की पर्ची चस्पा की जा रही है, ताकि मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा सके।

📋 क्या है यह 'कलर कोडिंग' सिस्टम?

प्रशासन द्वारा आवेदनों को तीन श्रेणियों में बांटने के लिए रंग निर्धारित किए गए हैं:

  • सफेद पर्ची: उन आवेदकों के लिए जो पहली बार जनसुनवाई में पहुंचे हैं।

  • पिंक (गुलाबी) पर्ची: उन पुराने मामलों के लिए जो पहले से लंबित हैं।

  • पीली पर्ची: ऐसे प्रकरणों के लिए जो सुनवाई योग्य नहीं हैं या जिनका मामला पहले से कोर्ट में विचाराधीन है।

🪑 बैठक व्यवस्था में बदलाव और आवेदकों को सीधा संवाद

भीड़ को नियंत्रित करने और प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए विभाग प्रमुखों के बैठने के स्थान में भी बदलाव किया गया है। अब हर अधिकारी के सामने आवेदक के बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था की गई है, ताकि वे सीधे विभाग प्रमुख से अपनी समस्या साझा कर सकें। इस बदलाव का उद्देश्य उन आवेदकों को चिन्हित करना है जो लगातार एक ही समस्या को लेकर जनसुनवाई में आते हैं।

🎙️ प्रशासन का विजन और चुनौतियां

कलेक्टर मिशा सिंह ने बताया कि उनकी प्राथमिकता हर आवेदक को सुनवाई का अवसर देना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लंबित आवेदनों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करें। हालांकि, नई व्यवस्था के बावजूद जनसुनवाई में अभी भी लंबी कतारें देखी जा रही हैं। पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अतिरिक्त डेस्क भी लगाई गई हैं।

🗣️ आवेदकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

जनसुनवाई में आए आवेदक शंकर लाल और विशाल पोरवाल ने नई व्यवस्था की सराहना तो की, लेकिन पंजीकरण प्रक्रिया में लगने वाले समय को लेकर चिंता भी जाहिर की। आवेदकों का मानना है कि यदि उनके आवेदन पर पहली बार में ही ठोस कार्रवाई हो जाए, तो बार-बार जनसुनवाई के चक्कर लगाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। रतलाम प्रशासन की यह कोशिश भविष्य में शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।

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