Indore RTO Server Down: आरटीओ की ऑनलाइन व्यवस्था ठप; फिटनेस, परमिट और लाइसेंस के लिए भटक रहे आवेदक

इंदौर आरटीओ में 4 दिन से सर्वर ठप। परमिट, फिटनेस और लाइसेंस की प्रक्रियाएं बंद। सिस्टम की तकनीकी खामियों की सजा भुगत रहे हैं आम नागरिक और कमर्शियल चालक।

Jun 24, 2026 - 10:03
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Indore RTO Server Down: आरटीओ की ऑनलाइन व्यवस्था ठप; फिटनेस, परमिट और लाइसेंस के लिए भटक रहे आवेदक

इंदौर। परिवहन विभाग ने अपनी सेवाओं को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के नाम पर पूरी व्यवस्था ऑनलाइन तो कर दी, लेकिन इस ऑनलाइन सिस्टम की रीढ़ माने जाने वाले सर्वर को दुरुस्त रखने में विभाग पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। नायता मुंडला स्थित आरटीओ कार्यालय में पिछले चार दिनों से सर्वर ठप पड़ा है, जिसका सीधा असर परमिट, फिटनेस, लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर पड़ा है।

🚛 कमर्शियल वाहनों के पहिए थमे, कारोबार पर सीधा असर

परिवहन विभाग का दावा था कि ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद आवेदकों को दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, लेकिन हकीकत इसके उलट है। सर्वर की सुस्ती के कारण हजारों आवेदन पेंडेंसी में दबते जा रहे हैं। सबसे ज्यादा मार उन कमर्शियल वाहन मालिकों और चालकों पर पड़ रही है, जिनकी आजीविका पूरी तरह से इन वाहनों पर टिकी है। फिटनेस और परमिट दस्तावेज समय पर न बन पाने के कारण व्यावसायिक वाहन सड़क पर नहीं उतर पा रहे हैं, जिससे उनके कारोबार को भारी नुकसान हो रहा है।

⚖️ गलती सिस्टम की, सजा आम जनता को

हैरानी की बात यह है कि विभागीय लापरवाही के कारण सर्वर डाउन है, लेकिन रिन्यूअल की प्रक्रिया समय पर पूरी न होने पर पेनल्टी का बोझ भी आवेदकों पर ही डाला जा रहा है। लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए आने वाले ओटीपी (OTP) भी समय पर नहीं मिल रहे, जिसके चलते घंटों इंतजार करने के बाद भी आवेदक खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। आरटीओ प्रदीप शर्मा ने स्वीकार किया है कि सर्वर डाउन होने की समस्या पूरे प्रदेश में व्याप्त है और सुधार कार्य जारी है।

📉 पुरानी बीमारी का समाधान कब?

यह कोई एक-दो दिन की तकनीकी दिक्कत नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही एक पुरानी समस्या है। ऑनलाइन सुविधा का ढोल पीटने वाले परिवहन विभाग पर अब सवाल उठ रहे हैं कि जब बुनियादी सिस्टम ही भरोसेमंद नहीं है, तो फिर इस डिजिटल व्यवस्था का क्या औचित्य? इंदौर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी यही स्थिति है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। सवाल यह है कि कब तक आम जनता को विभाग की तकनीकी अक्षमता की सजा भुगतनी पड़ेगी?

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