अमेरिका-ईरान युद्ध पर लगेगा विराम: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एलान, जंग छोड़ बातचीत की मेज पर आए दोनों देश
अमेरिका और ईरान के बीच भीषण संघर्ष विराम पर सहमति। डोनाल्ड ट्रंप के एलान के बाद ईरान ने भी दी मंजूरी, लेकिन रखीं 3 सख्त शर्तें। पूरी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट पढ़ें।
तेहरान। पश्चिम एशिया को हिलाकर रख देने वाले अमेरिका और ईरान के भीषण सैन्य संघर्ष पर अब विराम लगने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अचानक आए एक एलान और उसके बाद ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी की पुष्टि ने यह साफ कर दिया है कि दोनों महाशक्तियां अब जंग का मैदान छोड़कर बातचीत की मेज पर आ चुकी हैं। हालांकि, यह शांति इतनी आसान नहीं दिख रही है क्योंकि दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर अभी भी खींचतान जारी है।
🚢 पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एलान को समझिए
इस ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, "इरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है। सभी को बधाई।" अपने पोस्ट में ट्रंप ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नौसेना के समुद्री प्रतिबंध (ब्लॉकेड) को तुरंत हटाने की अनुमति देते हैं। उन्होंने वैश्विक शिपिंग कंपनियों से कहा, "दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो और तेल को बहने दो।"
💼 समझौते पर ईरान की मुहर, लेकिन शर्तें अभी भी सख्त
ट्रंप के एलान के बाद ईरान ने इस शांति समझौते पर सहमति तो जता दी है, लेकिन ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने साफ किया है कि इस समझौते का मतलब अमेरिका पर आंख मूंदकर भरोसा करना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार पहले जमीनी स्तर पर यह जांच करेगी कि अमेरिका अपने वादों को पूरा कर रहा है या नहीं। समझौते को लेकर उन्होंने बताया कि इस शुक्रवार यानी 19 जून को दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के बीच एक आधिकारिक बैठक होगी, जिसके बाद इस पूरे समझौते के मसौदे को आम जनता के लिए जारी कर दिया जाएगा।
💪 'यह समझौता ईरान की सैन्य ताकत के दम पर हुआ'
ईरान के सरकारी न्यूज़ चैनल 'प्रेस टीवी' और 'अल जजीरा' के मुताबिक, गरीबाबादी ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिका पर किसी भरोसे की वजह से नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य ताकत और रक्षा तैयारियों के दम पर हुआ है। उन्होंने दावा किया कि जिस अमेरिका ने अपने बुरे मंसूबों को पूरा करने के लिए ईरान पर हमला किया था, वह अपने मकसदों में पूरी तरह नाकाम रहा है। यह समझौता ईरान की सैन्य उपलब्धियों और वीर शहीदों के पवित्र खून का परिणाम है।
🛑 अमेरिका की परीक्षा के बाद ही आगे बढ़ेगी बात
ईरान ने इस समझौते को पूरी तरह शर्तों पर आधारित रखा है। उप-विदेश मंत्री के अनुसार, ईरान अपनी तीन सख्त शर्तों पर अभी भी पूरी तरह अडिग है:
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पहली शर्त: अमेरिका को सबसे पहले युद्ध पूरी तरह से रोकना होगा।
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दूसरी शर्त: समुद्री प्रतिबंध (ब्लॉकेड) को तुरंत हटाना होगा।
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तीसरी शर्त: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के जब्त किए गए पैसों और संपत्तियों को वापस करना होगा।
ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अगले 60 दिनों की अंतिम बातचीत के दौर में तभी शामिल होंगे, जब अमेरिका इन तीनों शुरुआती शर्तों को जमीन पर पूरा करके दिखाएगा।
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