अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिकी मिसाइल हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत, भारत सरकार का बड़ा फैसला
फारस की खाड़ी में अमेरिकी मिसाइल हमले के दौरान 3 भारतीय नाविकों की मौत के बाद DG शिपिंग का बड़ा फैसला। संघर्ष वाले युद्ध क्षेत्रों में नई ड्यूटी पर रोक।
दुनिया भर में करीब 3.5 लाख भारतीय नाविक व्यापारिक जहाजों पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इनमें से आधे से अधिक फिलहाल एक्टिव सर्विस में हैं और ज्यादातर विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग क्षेत्र में हर 6 नाविकों में से 1 भारतीय है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के मुताबिक, फारस की खाड़ी में फिलहाल लगभग 20 हजार नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं। इस बीच, हाल ही में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping) ने सभी समुद्री भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक नाविकों को संघर्ष वाले युद्ध क्षेत्रों में नई ड्यूटी पर न भेजा जाए।
📜 भारत सरकार ने एडवाइजरी में क्या कहा?
भारत के डायरेक्टर ऑफ शिपिंग के मुताबिक, इस क्षेत्र में तनाव शुरू होने के समय करीब 23 हजार भारतीय नाविक समुद्री सुविधाओं पर काम कर रहे थे, जिनमें से आधे से अधिक यूएई (UAE) में तैनात हैं। सरकार ने नई एडवाइजरी में होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में चलने वाले जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। आपातकालीन स्थिति में क्रू (Crew) बदलने की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए नाविकों की लिखित सहमति होना अनिवार्य कर दिया गया है।
🚀 तीन व्यापारिक जहाजों पर अमेरिकी नेवी का मिसाइल हमला
विगत 8, 10 और 11 जून को अमेरिकी नौसेना ने मारिवेक्स, सेटेबेलो और जलवीर नाम के तीन व्यापारिक जहाजों पर हेलफायर (Hellfire) मिसाइलों से हमला किया था। मारिवेक्स और जलवीर जहाजों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन 'सेटेबेलो' नामक जहाज पर तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। मृतकों में एक चीफ इंजीनियर, एक इंजन फिटर और एक डेक कैडेट शामिल थे। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🚢 शिप कंपनी ने अमेरिकी दावों को किया खारिज
अमेरिकी सेना का दावा है कि ये जहाज ईरानी तेल से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे और अमेरिकी नौसेना के निर्देशों की अनदेखी कर रहे थे। हालांकि, सेटेबेलो जहाज का संचालन करने वाली कंपनी 'IOS Marine FZE' ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि जहाज करीब 10 दिनों से एक ही जगह पर स्थिर खड़ा था। उसे अमेरिकी नौसेना से कोई चेतावनी नहीं मिली थी और उसका ईरानी तेल या ईरान के किसी भी बंदरगाह से कोई संबंध नहीं था।
💼 भारत ने अमेरिका के समक्ष दर्ज कराया कड़ा विरोध
इन गंभीर घटनाओं के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस विषय पर सीधी बात की और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर इस तरह के सैन्य हमले करना पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य है। भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।
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