मध्य प्रदेश शिक्षा रिपोर्ट: नौवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते क्यों पिछड़ रहे बच्चे? गणित में सिर्फ 36% विद्यार्थी सफल
नीति आयोग की रिपोर्ट में सामने आई एमपी की स्कूली शिक्षा की हकीकत। तीसरी में बच्चे होनहार, पर नौवीं में गणित का स्तर गिरा। शिक्षा विभाग ने शुरू की सुधार की नई रणनीति।
भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की एक गंभीर हकीकत सामने आई है। शुरुआती कक्षाओं में बच्चों का प्रदर्शन संतोषजनक है, लेकिन जैसे-जैसे वे उच्च कक्षाओं में बढ़ते हैं, उनकी सीखने की क्षमता में गिरावट दर्ज की गई है। केंद्र सरकार के नीति आयोग की 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया' रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि नौवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते केवल 36 प्रतिशत विद्यार्थी ही गणित के निर्धारित स्तर के सवाल हल कर पा रहे हैं।
📊 तीसरी कक्षा में भाषा-गणित में बेहतर स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, तीसरी कक्षा में मध्य प्रदेश के बच्चों का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। यहाँ 66 प्रतिशत बच्चे भाषा और 62 प्रतिशत बच्चे गणित में दक्ष पाए गए, जो राष्ट्रीय औसत (64% भाषा) से बेहतर है। 'आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान' (FLN) कार्यक्रमों का सकारात्मक असर यहाँ स्पष्ट दिखाई दे रहा है। हालांकि, पंजाब (82%), हिमाचल और केरल जैसे राज्यों की तुलना में एमपी अभी भी पीछे है।
⚠️ छठी और नौवीं में बढ़ती चुनौतियां
उच्च प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की अवधारणात्मक (Conceptual) समझ में कमजोरी देखी गई है। छठी कक्षा में भिन्न (Fraction), मापन और मानचित्र पढ़ने जैसे कौशल विकसित करने में छात्र संघर्ष कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति नौवीं कक्षा की है, जहाँ भाषा की दक्षता घटकर 52 प्रतिशत और गणित की दक्षता मात्र 36 प्रतिशत रह गई है। इसका अर्थ यह है कि 64 प्रतिशत छात्र बुनियादी गणितीय समस्याओं को हल करने में भी असमर्थ हैं।
🚀 शिक्षा विभाग की नई रणनीति
रिपोर्ट के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने अपनी रणनीति में बदलाव शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि अब प्राथमिक कक्षाओं में ही गणित और भाषा के आधार को अधिक मजबूत किया जाएगा। शिक्षाविद डॉ. दामोदर जैन के अनुसार, स्कूलों को सर्वसुविधायुक्त बनाने, विषयवार शिक्षकों की भर्ती और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने की अत्यंत आवश्यकता है।
📝 सुधार के लिए विशेष कदम
वर्तमान में विभाग द्वारा उच्च कक्षाओं के छात्रों के लिए 'ब्रिज कोर्स' और 'रेमेडियल क्लासेस' चलाई जा रही हैं। छात्रों को रेमेडियल वर्क-बुक उपलब्ध कराई जा रही हैं और शिक्षकों को नए शिक्षण तरीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि भविष्य में बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार हो सके।
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