जनसुनवाई के दावों की खुली पोल; 4 लाख की सहायता राशि के लिए 6 महीने से भटक रहा पीड़ित पिता

रतलाम जनसुनवाई में प्रशासनिक उदासीनता। बेटे की मौत के बाद स्वीकृत 4 लाख की आर्थिक सहायता के लिए 6 महीने से भटक रहा किसान। जानिए क्या है पूरा मामला।

Jun 30, 2026 - 18:01
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जनसुनवाई के दावों की खुली पोल; 4 लाख की सहायता राशि के लिए 6 महीने से भटक रहा पीड़ित पिता

रतलाम। जिले की जनसुनवाई व्यवस्था में सुधार के तमाम दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है। बड़ावदा तहसील के हीरूखेड़ी गांव के रहने वाले रमेश चंद्र निनामा अपने बेटे की असामयिक मृत्यु के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए पिछले एक साल से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

⚡ क्या है पूरा मामला?

पिछले साल मार्च में सिंचाई के दौरान करंट लगने से रमेश निनामा के बेटे योगेश की मृत्यु हो गई थी। इस दुखद घटना के बाद परिवार को 'कृषक जीवन कल्याण योजना' के तहत मदद की उम्मीद थी। बड़ी मशक्कत के बाद, कलेक्टर के निर्देश पर जनवरी 2026 में 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई। लेकिन विडंबना यह है कि स्वीकृति के 6 महीने बाद भी यह राशि पीड़ित परिवार के खाते में नहीं पहुंच सकी है।

🔄 'दफ्तर-दफ्तर' दौड़ने को मजबूर पीड़ित

रमेश निनामा बताते हैं कि उन्होंने सहायता राशि के लिए 7 महीने तो आवेदन स्वीकृत करवाने में लगा दिए, और अब स्वीकृत राशि पाने के लिए 6 महीने से जनसुनवाई में गुहार लगा रहे हैं। 65 किलोमीटर दूर से आकर बार-बार निराश लौटना उनके लिए बड़ी मानसिक और आर्थिक पीड़ा का कारण बन गया है। अब उन्हें जवाब दिया जा रहा है कि राशि मंडी बोर्ड, उज्जैन से आएगी।

🏛️ प्रशासन का क्या है कहना?

जनसुनवाई कर रही अधिकारी राधा महंत का कहना है कि यह राशि मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड के माध्यम से मिलनी है। जैसे ही मंडी बोर्ड से फंड प्राप्त होगा, उसे हितग्राही के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

❓ सवालों के घेरे में जनसुनवाई

यह मामला जनसुनवाई की प्रभावशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जब कलेक्टर द्वारा सहायता स्वीकृत हो चुकी है, तो फिर पीड़ित पिता को उज्जैन के दफ्तरों तक क्यों दौड़ाया जा रहा है? क्या जिला प्रशासन के पास इतनी शक्ति नहीं है कि वह मंडी बोर्ड से समन्वय कर पीड़ित को समय पर राहत दिला सके? बेटा खोने के बाद न्याय की आस में भटकता यह पिता आज व्यवस्था के प्रति पूरी तरह निराश है।

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