बहू को बेटी मानकर कराया पुनर्विवाह; ससुर ने खुद किया कन्यादान, कैंसर से पति की मौत के बाद बदली बहू की किस्मत

उज्जैन के एक ससुर ने अपनी विधवा बहू को बेटी मानकर उसका पुनर्विवाह कराया। पति की कैंसर से मौत के बाद ससुर ने खुद कन्यादान कर समाज के सामने पेश की मिसाल।

Jul 09, 2026 - 10:40
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बहू को बेटी मानकर कराया पुनर्विवाह; ससुर ने खुद किया कन्यादान, कैंसर से पति की मौत के बाद बदली बहू की किस्मत

उज्जैन। समाज में ससुर और बहू के रिश्ते को नई परिभाषा देने वाली एक प्रेरणादायक घटना उज्जैन जिले के जैथल गांव से सामने आई है। दिनेश वैरागी नामक एक ससुर ने अपने दिवंगत बेटे की पत्नी प्रियंका का न केवल पुनर्विवाह कराया, बल्कि एक पिता की भूमिका निभाते हुए धूमधाम से उसका कन्यादान भी किया। पति की कैंसर से असमय मृत्यु के बाद बहू की जिंदगी को अकेला न छोड़ने का दिनेश वैरागी का यह फैसला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

🎗️ दुख के बाद नई उम्मीद: 2023 में हुई थी पति की मृत्यु

प्रियंका की शादी 2018 में जैथल गांव के कपिल से हुई थी। कुछ वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद कपिल को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया। लंबे इलाज के बावजूद 2023 में कपिल का निधन हो गया, जिससे प्रियंका की दुनिया उजड़ गई। उस समय प्रियंका महज 24 साल की थी। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि प्रियंका का भविष्य क्या होगा, लेकिन उसके ससुर दिनेश वैरागी ने उसे हार नहीं मानने दी।

🤝 ससुर का संकल्प: बहू नहीं, बेटी बनाकर रचाई शादी

दिनेश वैरागी ने अपनी बहू को ताउम्र विधवा के रूप में नहीं, बल्कि एक नए जीवन के साथ देखने का संकल्प लिया। उन्होंने खुद रिश्ता तलाशना शुरू किया। विदिशा के अटारीखेड़ा निवासी गोविंद के साथ रिश्ता तय हुआ, जो वर्तमान में खंडवा में कार्यरत हैं। भोपाल के एक रिसॉर्ट में आयोजित इस भव्य समारोह में दिनेश वैरागी ने पिता का फर्ज निभाते हुए 350 मेहमानों के बीच प्रियंका का कन्यादान किया।

🌟 समाज के लिए प्रेरणा

प्रियंका के पिता रामबाबू ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनके समधी इतनी गरिमा के साथ उनकी बेटी को विदा करेंगे। दूल्हे गोविंद ने भी इस रिश्ते को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। दिनेश वैरागी का यह कार्य उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह को आज भी संकोच की दृष्टि से देखते हैं। यह घटना साबित करती है कि यदि परिवार का सहयोग साथ हो, तो किसी भी दुखद स्थिति से उबरकर नई जिंदगी शुरू की जा सकती है।

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