टीकमगढ़ की वैरवार पंचायत में सरपंच की अनूठी मुहिम; गरीब बच्चों को मिलेगा बैग और कॉपी-पेंसिल

टीकमगढ़ के वैरवार गांव में सरपंच ने ढोल बजाकर स्कूल चलो अभियान शुरू किया। गरीब बच्चों को पंचायत देगी स्कूल बैग और सामग्री। शिक्षा के प्रति जगाई जागरूकता।

Jul 09, 2026 - 12:29
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टीकमगढ़ की वैरवार पंचायत में सरपंच की अनूठी मुहिम; गरीब बच्चों को मिलेगा बैग और कॉपी-पेंसिल

टीकमगढ़। शिक्षा के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत वैरवार के सरपंच ने एक सराहनीय कदम उठाया है। सत्र शुरू होने के बाद विद्यालयों में छात्रों की कम संख्या को देखते हुए सरपंच एडवोकेट सुरेंद्र सिंह दांगी ने 'स्कूल चलो अभियान' के तहत पूरे गांव में ढोल-बाजे के साथ मुनादी कराई। इस अनूठी पहल का उद्देश्य हर अभिभावक को शिक्षा का महत्व समझाना और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना है।

🎒 गरीब बच्चों को पंचायत देगी शैक्षिक सामग्री

सरपंच सुरेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को स्कूल बैग, स्लेट, पेंसिल, कॉपी और पेन मुफ्त उपलब्ध कराने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, "शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। हमारा लक्ष्य है कि गांव का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।" मुनादी के माध्यम से ग्रामीणों को शासन द्वारा मिलने वाली निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों और गणवेश (ड्रेस) की सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

📊 जनभागीदारी से होगी स्कूल संचालन की निगरानी

सरपंच ने न केवल बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने की अपील की, बल्कि ग्रामीणों से यह भी कहा कि वे स्कूल संचालन पर निरंतर निगरानी रखें। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे देखें कि स्कूल अपने निर्धारित समय (सुबह 10:30 से शाम 4:30 तक) पर खुल रहे हैं या नहीं और शिक्षक समय पर पहुंच रहे हैं या नहीं। सरपंच का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो गांव के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

🌟 ग्रामीणों ने की पहल की सराहना

इस पहल को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ढोल-नगाड़ों के साथ हुई इस मुनादी ने लोगों के बीच शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश दिया है। मुनादी के माध्यम से सीधे संवाद होने के कारण अब अधिक से अधिक अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय में प्रवेश कराने और उन्हें नियमित रूप से भेजने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। सरपंच का यह प्रयास शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित परिवारों के बच्चों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है।

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