जुलाई से शुरू हो रहा चातुर्मास; जानें कब तक बंद रहेंगे मांगलिक कार्य और क्या है महत्व?
जुलाई में चातुर्मास की शुरुआत। 25 जुलाई 2026 से 20 नवंबर 2026 तक बंद रहेंगे विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य। जानें चातुर्मास में शिव पूजा का महत्व।
शहडोल। हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री के अनुसार, इस वर्ष चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 को 'देवशयनी एकादशी' से हो रही है और इसका समापन 20 नवंबर 2026 को 'देवउठनी एकादशी' पर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं और ब्रह्मांड का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है।
🚫 चातुर्मास में मांगलिक कार्यों पर विराम
चातुर्मास की शुरुआत के साथ ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, दुकान या मकान का उद्घाटन जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि में किए गए मांगलिक कार्यों से पूर्ण या शुभ फल प्राप्त नहीं होता। इसके अलावा, इस दौरान नर्मदा परिक्रमा पर भी चार महीने का ब्रेक रहता है। दीपावली के बाद जब भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं, तब 'देवउठनी एकादशी' मनाई जाती है और शुभ कार्यों का पुनः आरंभ होता है।
🕉️ शिव भक्ति का श्रेष्ठ समय
चातुर्मास के दौरान जब ब्रह्मांड की कमान भगवान भोलेनाथ के पास होती है, तो शिव की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। भक्त इस दौरान रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप का अनुष्ठान करते हैं। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, दही, गंगाजल, शहद, शक्कर, फूल और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दौरान शिवजी को प्रसन्न करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
🧘 तप, त्याग और सात्विक जीवन का काल
चातुर्मास केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि तपस्या और योग का भी समय है। इस अवधि में संत-महात्मा एकांत स्थानों पर जाकर धुनी रमाते हैं और ध्यान में लीन रहते हैं। सामान्य जन भी इस दौरान सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। कई लोग इन चार महीनों में विशेष व्रत रखते हैं, जैसे दिन में केवल एक बार आहार लेना, जमीन पर शयन करना (बिस्तर का त्याग) और ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करना। यह भौतिक सुखों को छोड़कर जप, तप और दान के माध्यम से आत्म-कल्याण का विशेष समय है।
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