एमपी पुलिस का 'सेफ क्लिक' अभियान; अब 25 हजार से ऊपर की धोखाधड़ी पर भी दर्ज होगी ई-एफआईआर
मध्यप्रदेश में 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान सफल। 8 करोड़ लोग साइबर फ्रॉड के प्रति जागरूक। अब 25 हजार से अधिक की ठगी पर भी घर बैठे दर्ज करें ई-एफआईआर।
भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा शुरू किया गया 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान बेहद सफल साबित हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 24 जून को शुरू किए गए इस 15 दिवसीय प्रदेश स्तरीय अभियान का समापन नरोन्हा प्रशासन अकादमी में हुआ। इस पहल ने न केवल हजारों लोगों को साइबर ठगी का शिकार होने से बचाया, बल्कि डिजिटल सुरक्षा के प्रति आमजन का भरोसा भी बढ़ाया है।
🚀 अपराध से दो कदम आगे: डीजीपी का संकल्प
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि साइबर अपराधियों से हमें हमेशा दो कदम आगे रहना होगा। उन्होंने बताया कि 'सेफ क्लिक' की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे अपराधों में कमी आई है। उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि अब प्रदेश में 1 लाख के बजाय 25 हजार रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी होने पर भी पीड़ित घर बैठे ई-एफआईआर (E-FIR) दर्ज करा सकेंगे। यह कदम आम नागरिकों को त्वरित राहत दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।
📊 जन-जन तक पहुँची जागरूकता: 8 करोड़ लोगों का जुड़ाव
अभियान के दौरान प्रदेश भर में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। आँकड़ों के अनुसार, 15 दिनों के भीतर प्रदेश भर के स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थाओं में 8,600 से अधिक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुए। इस अभियान के माध्यम से:
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1 करोड़ लोगों को सीधे कार्यक्रमों के जरिए जागरूक किया गया।
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8 करोड़ लोगों तक ऑनलाइन माध्यमों से साइबर सुरक्षा का संदेश पहुँचाया गया। सिवनी जैसे जिलों में महिला संगठनों ने घर-घर जाकर अभियान को गति दी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता का स्तर बढ़ा है।
💡 डिजिटल व्यवहार को मिली नई दिशा
इस अभियान का मूल उद्देश्य नागरिकों को जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। डीजीपी ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और सोशल मीडिया के उपयोग में पूरी सावधानी बरतें। पुलिस का यह 'सेफ क्लिक' मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है, जहाँ साइबर अपराधों को तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय से नियंत्रित किया जा रहा है।
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