समय पर एंबुलेंस न मिलने से आदिवासी महिला की पीड़ा; बारिश में खुले आसमान के नीचे दिया बच्चे को जन्म
शिवपुरी के बैराड़ में एंबुलेंस न मिलने पर महिला को सड़क किनारे प्रसव करना पड़ा। तहसीलदार ने सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुँचाकर जान बचाई।
शिवपुरी। मध्य प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली का एक और मार्मिक मामला सामने आया है। शिवपुरी जिले के बैराड़ क्षेत्र में समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण एक आदिवासी प्रसूता को भारी बारिश के बीच सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा। घंटों इंतजार के बावजूद जब एंबुलेंस नहीं पहुंची, तो परिजनों ने मोटरसाइकिल का सहारा लिया, लेकिन रास्ते में ही प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और महिला ने खुले आसमान के नीचे बच्चे को जन्म दिया।
🚗 मसीहा बने तहसीलदार, सरकारी गाड़ी से पहुँचाया अस्पताल
इस दुखद घटना के दौरान वहां से गुजर रहे राहगीर धीरज ओझा ने मामले की सूचना बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैस को दी। तहसीलदार ने बिना समय गंवाए अपनी सरकारी गाड़ी मौके पर भेजी। स्वयं मौके पर पहुंचकर उन्होंने नवजात और प्रसूता को सुरक्षित अपनी गाड़ी में लिटाया और उन्हें बैराड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया। इस त्वरित मानवीय कार्रवाई के कारण जच्चा-बच्चा को समय पर उपचार मिल सका।
🩺 डॉक्टर बोले: दोनों सुरक्षित, परिजनों में गहरा आक्रोश
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनका इलाज जारी है। हालांकि, इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों और परिजनों में एंबुलेंस संचालक के प्रति भारी आक्रोश है। लोगों ने मांग की है कि यदि समय पर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध होती, तो एक प्रसूता को ऐसी विषम परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता। प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है।
⚠️ सुधर नहीं रही एंबुलेंस की व्यवस्था
यह कोई पहला मामला नहीं है जब 108 एंबुलेंस की लापरवाही सामने आई हो। प्रदेश भर में लगातार ऐसी खबरें मिल रही हैं जहाँ एंबुलेंस की कमी या चालक की लापरवाही के कारण मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएमओ द्वारिका धाकड़ ने बताया कि अस्पताल में दोनों का इलाज जारी है और स्थिति खतरे से बाहर है।
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