अशिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर ज्यादा; शिक्षित परिवार बन रहे छोटे, जनगणना रिपोर्ट ने खोली पोल
मध्य प्रदेश में शिक्षा का स्तर बढ़ा तो छोटा हुआ परिवार। SRS रिपोर्ट 2024 के अनुसार अशिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर 3.6 और स्नातकों में 2.1 दर्ज।
भोपाल। समाज में यह धारणा हमेशा से रही है कि शिक्षा का सीधा संबंध छोटे परिवार से होता है। जनगणना निदेशालय की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट 2024 ने अब इस तथ्य पर मुहर लगा दी है। मध्य प्रदेश के आंकड़ों को देखें तो अशिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर जहाँ 3.6 है, वहीं स्नातक या उच्च शिक्षित महिलाओं में यह घटकर 2.1 रह जाती है। साक्षरता का प्रभाव स्पष्ट है—शिक्षा का स्तर जैसे-जैसे ऊपर बढ़ता है, परिवार नियोजन की समझ और छोटा परिवार रखने की प्रवृत्ति बढ़ती है।
📈 चौथा स्थान: सामान्य प्रजनन दर (GFR) की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वाधिक सामान्य प्रजनन दर (GFR) के मामले में मध्य प्रदेश का स्थान बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बाद देश में चौथा है। मध्य प्रदेश की GFR 70 है, जो कि 63 के राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। यह आंकड़ा प्रति हजार 15 से 49 वर्ष की महिलाओं पर एक वर्ष में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को दर्शाता है।
👦 भविष्य का 'युवा राज्य' बनने की ओर मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में शून्य से चार वर्ष के बच्चों का कुल आबादी में प्रतिशत देश में सर्वाधिक (9.4 प्रतिशत) है। वहीं, शून्य से 14 वर्ष की आयु वर्ग की बात करें तो बिहार (31.5%) के बाद मध्य प्रदेश (27.3%) दूसरे स्थान पर है। राज्य की लगभग एक-चौथाई आबादी इसी आयु वर्ग की है, जो भविष्य में मध्य प्रदेश को एक सशक्त 'युवा राज्य' के रूप में स्थापित करेगी।
⚖️ शिशु लिंगानुपात: शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्थिति
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण पहलू शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष) का भी है। राज्य का औसत लिंगानुपात 919 है, जो राष्ट्रीय औसत (918) से मात्र एक अंक बेहतर है। ग्रामीण क्षेत्र (912) की तुलना में शहरी क्षेत्रों (946) में लिंगानुपात बेहतर स्थिति में है। हालांकि, केरल (974) और छत्तीसगढ़ (978) जैसे राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश को इस दिशा में अभी काफी सुधार करने की आवश्यकता है, ताकि कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों को जड़ से खत्म किया जा सके।
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