बदहाल सड़कों और जाम से जूझ रहे इंदौरवासी; निगम के अफसरों को मंगलवार को कोर्ट में होना होगा हाजिर
इंदौर में यातायात और बदहाल सड़कों को लेकर हाईकोर्ट सख्त। नगर निगम से गड्ढों की ऑनलाइन शिकायत पर जवाब मांगा। जिम्मेदार अफसरों को किया तलब।
इंदौर। इंदौर में लगातार बिगड़ते यातायात और बरसात के कारण सड़कों पर बने गड्ढों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि हर वर्ष मानसून के दौरान शहर की सड़कों का यही हाल होता है, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए नगर निगम से पूछा है कि जिस तरह कचरे और ड्रेनेज के लिए 'मेयर हेल्पलाइन ऐप (311)' का उपयोग होता है, वैसी सुविधा सड़कों के गड्ढों की शिकायत के लिए क्यों नहीं है?
📱 311 ऐप पर सुविधा का अभाव: निगम से जवाब तलब
जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने नगर निगम से स्पष्टीकरण मांगा है कि आम नागरिक अपनी समस्या के समाधान के लिए सीधे फोटो कैसे अपलोड कर सकते हैं। नगर निगम के वकील ने इस पर जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसके बाद कोर्ट ने निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को मंगलवार (14 जुलाई) को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।
🚧 कई मोर्चों पर नाकाम प्रशासन, कोर्ट में पेश किए सबूत
शहर में यातायात सुधार, अवैध पार्किंग, फुटपाथों पर कब्जा, बीआरटीएस हटाने में देरी और 24 घंटे ट्रैफिक सिग्नल न चलने जैसी समस्याओं को लेकर पांच अलग-अलग याचिकाएं लंबित हैं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागड़िया और मनीष यादव ने कोर्ट में सड़कों की बदहाल तस्वीरों के साथ जाम की स्थिति को भी प्रस्तुत किया। कोर्ट ने सरकार और नगर निगम से पूछा है कि यातायात सुधार के लिए आखिर ठोस योजना क्या है।
🏛️ 14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने अब यातायात प्रबंधन से जुड़े प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के उच्च अधिकारियों को तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल दिखावे की कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि सड़कों के रखरखाव के लिए एक स्थायी और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है। अब सभी की निगाहें 14 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अधिकारियों को कोर्ट के पूर्व आदेशों के पालन और भविष्य की कार्ययोजना पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
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