अपनी मौत से पहले ऐतिहासिक डील कराने वाले थे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अपनी मौत से पहले इज़राइल-सऊदी अरब के बीच नॉर्मलाइजेशन डील का खाका तैयार किया था। डोनाल्ड ट्रंप की टीम और नेतन्याहू से भी हुई थी चर्चा।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम अपनी मौत से कुछ हफ़्ते पहले एक ऐसे कूटनीतिक मिशन पर काम कर रहे थे, जो मध्य पूर्व की राजनीति को हमेशा के लिए बदल सकता था। एक्सियोस (Axios) की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिकन पार्टी के अनुभवी नेता और इज़राइल के कट्टर समर्थक ग्राहम, इज़राइल और सऊदी अरब के बीच एक ऐतिहासिक 'नॉर्मलाइजेशन डील' (संबंधों को सामान्य बनाना) कराने की नई पहल कर रहे थे। उनका मानना था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के आक्रामक रुख ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह डील संभव बनाने का एक बेहतरीन मौका तैयार कर दिया है।
🗓️ चुनावों के बाद जोरदार कूटनीतिक कोशिश की थी योजना
रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहम चाहते थे कि अक्टूबर के अंत में इज़राइल में होने वाले चुनावों और अमेरिका में होने वाले मिडटर्म (Midterm) चुनावों के तुरंत बाद एक जोरदार कूटनीतिक प्रयास शुरू किया जाए। उनका लक्ष्य जनवरी में नई अमेरिकी कांग्रेस के शपथ ग्रहण से पहले इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप देना था। यह भी सामने आया है कि ग्राहम ने हाल ही में ट्रंप से आग्रह किया था कि यदि कूटनीति विफल होती है, तो 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए एक छोटा लेकिन सशक्त सैन्य अभियान चलाया जाए।
📞 ट्रंप और अरब नेताओं के साथ हुई थी उच्च स्तरीय चर्चा
इस योजना की शुरुआत मई 2026 के मध्य में ही हो गई थी, जब ग्राहम ने ट्रंप के साथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने जोर दिया कि 'ईरान युद्ध' के बाद अगला लक्ष्य इज़राइल-सऊदी संबंधों को सुधारना होना चाहिए। इस चर्चा के ठीक एक हफ्ते बाद, ट्रंप ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल में कई अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं से अपील की थी कि यदि ईरान के साथ समझौता हो जाता है, तो वे इज़राइल के साथ संबंध स्थापित करें। ग्राहम ने इस पहल पर ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी रॉन डर्मर, और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान के साथ भी चर्चा की थी।
🇵🇸 फिलिस्तीन मुद्दा और संभावित चुनौतियां
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले ही इज़राइल के साथ संबंध सुधारने में रुचि दिखा चुके हैं, लेकिन रियाद की एक अटल शर्त रही है। सऊदी अरब का कहना है कि किसी भी समझौते में 'फिलिस्तीनी राज्य' की स्थापना का एक स्पष्ट और समयबद्ध रास्ता शामिल होना चाहिए। हालांकि, नेतन्याहू की वर्तमान गठबंधन सरकार ने इस शर्त को सिरे से खारिज कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ग्राहम की इस महत्वाकांक्षी योजना में सबसे बड़ी बाधा इज़राइल की अगली सरकार को फिलिस्तीन मुद्दे पर सहमत करना था।
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