सागर की मिसाल: नगर निगम के दो कर्मचारी पिछले 12 सालों से अपने खर्च पर लगा रहे हजारों पेड़, पौधरोपण को बनाया संकल्प
सागर नगर निगम के दो कर्मचारी प्रताप सेन और अखिलेश्वर शुक्ला पिछले 12 सालों से अपनी जेब से खर्च कर शहर में हजारों पेड़ लगा रहे हैं। पढ़ें पर्यावरण के प्रति उनके इस जज्बे की कहानी।
सागर। आमतौर पर लोग केवल खास मौकों पर रस्म अदायगी के तौर पर पौधरोपण करते हैं और फिर उन्हें भूल जाते हैं। लेकिन सागर नगर निगम के राजस्व विभाग में कार्यरत दो कर्मचारी, प्रताप सेन और अखिलेश्वर नाथ शुक्ला, इस मामले में अपवाद हैं। पिछले 12 सालों से ये दोनों अपनी मेहनत की कमाई से न केवल पौधे लगा रहे हैं, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक बच्चों की तरह पाल भी रहे हैं।
💪 रस्म अदायगी नहीं, यह है एक संकल्प
इन दोनों कर्मचारियों के लिए पौधरोपण कोई दिखावा नहीं, बल्कि एक मिशन है। प्रताप सेन और अखिलेश्वर शुक्ला अपनी छुट्टियों और खाली समय का उपयोग कर शहर को हरा-भरा करने में जुटे हैं। इनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे पौधे लगाने के बाद उन्हें उनके हाल पर नहीं छोड़ते। पहले वे ऐसी सुरक्षित जगह तलाशते हैं जहाँ पौधे सुरक्षित रहें, फिर नियमित पानी और देखभाल की जिम्मेदारी खुद उठाते हैं। इन्होंने छावनी इलाके की पानी की टंकी के मैदान में 200 से अधिक पेड़ लगाकर उसे एक सुंदर उपवन में बदल दिया है।
💰 खुद के खर्च पर खड़ी की हरियाली की नींव
हैरानी की बात यह है कि ये दोनों कर्मचारी किसी सरकारी योजना या संस्था की मदद नहीं लेते। पौधे खरीदने से लेकर पानी के टैंकर और नल लगवाने तक का पूरा खर्च ये अपनी जेब से करते हैं। प्रताप सेन बताते हैं कि 2014 में उन्होंने छावनी क्षेत्र में पौधे लगाने की शुरुआत की थी। वहीं, अखिलेश्वर नाथ शुक्ला का कहना है कि 2020 की कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन के महत्व को समझते हुए उन्होंने अपना यह मिशन और तेज कर दिया। वे अब तक अपने निजी खर्च से हजारों रुपये पर्यावरण के नाम कर चुके हैं।
🌳 बड़े पेड़ों के चयन पर जोर
अखिलेश्वर शुक्ला बताते हैं कि वे ज्यादातर 5 से 6 फीट ऊंचे पौधे ही खरीदते हैं, ताकि वे कम समय में पेड़ बनकर लोगों को छाया और ऑक्सीजन दे सकें। ट्रैफिक पार्क, महलवार मंदिर और कई निजी कॉलोनियों में भी उनकी मेहनत के निशान देखे जा सकते हैं। भीषण गर्मी के दिनों में पेड़ों की सुरक्षा करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन यह 'ग्रीन जोड़ी' आज भी उतनी ही शिद्दत से पौधों की सेवा में जुटी है।
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