नगर निगम ने तोड़ा दफ्तर, तो बीजेपी पार्षद ने सड़क पर ही खोल लिया कार्यालय; भोपाल में सियासी घमासान
भोपाल के वार्ड 62 से बीजेपी पार्षद राजेश चौकसे का दफ्तर नगर निगम ने अवैध बताकर तोड़ा। पार्षद ने सड़क किनारे ही टेबल-कुर्सी लगाकर शुरू की जनसुनवाई। पढ़ें पूरी खबर।
भोपाल। राजधानी भोपाल के आनंद नगर में नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद शुरू हुआ विवाद अब बड़ा सियासी रंग लेता जा रहा है। वार्ड-62 के बीजेपी पार्षद राजेश चौकसे ने अपना कार्यालय टूटने के बाद हार मानने के बजाय सड़क पर ही अपना दफ्तर खोल लिया है। वे खुले आसमान के नीचे कुर्सी-टेबल लगाकर क्षेत्रवासियों की समस्याएं सुन रहे हैं। सड़क किनारे लगे एक बैनर पर उनकी तस्वीर के साथ लिखा है— "वार्ड 62 पार्षद कार्यालय, सड़क किनारे।" सड़क पर चल रहे इस अनोखे कार्यालय की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
🏢 नगर निगम की कार्रवाई: अवैध निर्माण बताकर जमींदोज किया पार्षद कार्यालय
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शुक्रवार सुबह हुई, जब नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आनंद नगर स्थित सरकारी दुकानों के ऊपर बने पार्षद कार्यालय को ढहा दिया था। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण बिना किसी वैध लिखित अनुमति के किया गया था, इसलिए नियमानुसार अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
🗣️ पार्षद का पलटवार: 'जनता की सेवा किसी आलीशान भवन की मोहताज नहीं'
निगम की इस कार्रवाई के बाद बीजेपी पार्षद राजेश चौकसे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सड़क पर बैठकर लोगों की जनसुनवाई करते हुए उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करने के लिए किसी बड़े भवन या चारदीवारी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस निर्माण के लिए उन्होंने पूर्व में मौखिक अनुमति ली थी, इसलिए अचानक बिना किसी उचित समय के कार्यालय को तोड़ना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और नियमों के विरुद्ध है।
⚖️ राजनीतिक दबाव के आरोप: मंत्री पर साधा निशाना, निगम ने दी सफाई
सत्तारूढ़ दल के पार्षद होने के बावजूद राजेश चौकसे ने अपनी ही सरकार के एक मंत्री पर राजनीतिक द्वेष के चलते उनका कार्यालय तुड़वाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्षद का कहना है कि यह कार्रवाई किसी नियम के तहत नहीं बल्कि शुद्ध रूप से राजनीतिक दबाव में की गई है। दूसरी ओर, नगर निगम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी और शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है। बहरहाल, इस कार्रवाई ने भोपाल की स्थानीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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