ईरान का जॉर्डन की जनता को संदेश; कहा— अपने देश से अमेरिकी सैन्य ठिकाने हटाने की मांग करें
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। जॉर्डन की जनता से अमेरिकी बेस हटाने की अपील की।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता टूटने के बाद से मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देश लगातार एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इस बीच, ईरान की सबसे शक्तिशाली सेना 'ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए बड़े मिसाइल हमले की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। IRGC ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि उनके लड़ाकों ने 'या लिसारात अल-हुसैन' के नारे के साथ 'नस्र-2' (Nasr-2) ऑपरेशन की दूसरी लहर के तीसरे चरण के तहत जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य हवाई अड्डे और सैनिकों के ठहरने के ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया।
🤝 जॉर्डन से कोई दुश्मनी नहीं: अमेरिकी सैनिकों को हमले का जवाब देने के लिए की गई कार्रवाई— IRGC
इस हमले के बाद जॉर्डन सरकार की ओर से बयान आया कि उसकी वायु सेना और एयर डिफेंस सिस्टम ने अपनी सीमा में प्रवेश करने वाली ईरान की 4 मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया। इस कार्रवाई में फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई खबर नहीं है। हमले के बाद जॉर्डन की जनता के नाम एक विशेष संदेश जारी करते हुए IRGC ने स्पष्ट किया कि ईरान की जॉर्डन के साथ कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। IRGC ने दावा किया कि इसी अमेरिकी एयरबेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हवाई हमले करने के लिए किया गया था, जिसके जवाब में यह जवाबी कार्रवाई की गई है। बयान में यह आरोप भी लगाया गया कि अमेरिका ने इसी बेस का इस्तेमाल कर ईरान के मीनाब शहर में 186 निर्दोष स्कूली बच्चों और शिक्षकों की जान ली थी।
📢 जनता से अपील: क्षेत्र में शांति के लिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाने की मांग करे जॉर्डन की आवाम
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन की जनता को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा, "हम जॉर्डन की सम्मानित जनता का बेहद सम्मान करते हैं। आप फिलिस्तीनी भाई-बहनों के दर्द और गाजा में निर्दोषों पर हो रहे अत्याचारों को अच्छी तरह समझते हैं।" IRGC ने जॉर्डन की आवाम से मांग की कि वे अपने देश की सरकार पर दबाव बनाएं ताकि क्षेत्र से सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाया जा सके। बयान में कहा गया कि अमेरिकी सेना की विदाई से ही फिलिस्तीनी लोगों की वास्तविक मदद होगी और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा बहाल हो सकेगी।
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