सिंधु जल संधि विवाद के बीच लश्कर की बड़ी साजिश; मंगला डैम में आतंकियों को मिल रही जलमार्ग से हमले की ट्रेनिंग

सिंधु जल संधि विवाद के बीच लश्कर-ए-तैयबा PoJK के मंगला डैम में आतंकियों को जलमार्ग से हमले की ट्रेनिंग दे रहा है। खुफिया इनपुट के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

Jul 14, 2026 - 17:31
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सिंधु जल संधि विवाद के बीच लश्कर की बड़ी साजिश; मंगला डैम में आतंकियों को मिल रही जलमार्ग से हमले की ट्रेनिंग

सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार के कड़े रुख के बाद, पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने पानी के रास्ते भारत पर हमले की खतरनाक तैयारी शुरू कर दी है। खुफिया और सुरक्षा सूत्रों से मिले इनपुट के मुताबिक, लश्कर अपने आतंकियों को जलमार्ग से विशेष ऑपरेशन संचालित करने की ट्रेनिंग दे रहा है। इस नापाक ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थित मंगला डैम इलाके का इस्तेमाल किया जा रहा है।

⚓ जलमार्ग से घुसपैठ: 26/11 मुंबई हमले की तर्ज पर लश्कर बना रहा नई रणनीतिक टाइमलाइन

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, लश्कर के वरिष्ठ कमांडर हारिस दार ने हाल ही में एक सक्रिय ट्रेनिंग कैंप में आतंकियों को संबोधित करते हुए पानी से जुड़े ऑपरेशन्स का विशेष जिक्र किया है। उसने आतंकियों से कहा कि 10 दिनों का बेसिक कोर्स पूरा हो चुका है और अब मंगला डैम में एडवांस वाटर-ट्रेनिंग शुरू की जाएगी। हारिस दार ने दावा किया कि पानी को लेकर उनका मुख्य विवाद भारत के साथ है और साल 2026 में पाकिस्तान पानी के मुद्दे पर कोई बड़ा कदम उठा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां इस बयान को 26/11 मुंबई हमले की तर्ज पर समुद्री या नदी मार्ग से नए हमले की रणनीति के रूप में देख रही हैं, क्योंकि मुंबई हमले के आतंकियों को भी इसी मंगला डैम इलाके में ट्रेनिंग मिलने की बात सामने आई थी।

🚨 सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट: आतंकी कैंपों और सीमाओं पर भारतीय सेना की पैनी नजर

इस गंभीर खुफिया इनपुट के बाद भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। हालिया पहलगाम आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड सैफुल्लाह खालिद कसूरी को भी इसी मंगला डैम ट्रेनिंग हब में देखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लश्कर अपने पुराने टेरर नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश में है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब सीमा पार के सभी लॉन्च पैड्स, आतंकी कैंपों, जलमार्गों और संदिग्ध गतिविधियों पर सैटेलाइट और जमीनी नेटवर्क के जरिए पैनी नजर बनाए हुए हैं। सिंधु जल संधि से उपजे कूटनीतिक तनाव के बीच सीमावर्ती नदी क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है।

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