2.50 लाख डाक सेवकों के भविष्य का सवाल! नियमित पेंशन और भत्तों की मांग को लेकर मुख्य डाक भवन पर नारेबाजी

8वें वेतन आयोग में ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को शामिल न करने पर भोपाल में जोरदार प्रदर्शन। कर्मचारियों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ज्ञापन सौंपकर मांगें उठाईं।

Jul 14, 2026 - 18:19
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2.50 लाख डाक सेवकों के भविष्य का सवाल! नियमित पेंशन और भत्तों की मांग को लेकर मुख्य डाक भवन पर नारेबाजी

भोपाल। देश में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतनमान की घोषणा के साथ ही आधिकारिक तौर पर 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है। वर्तमान में यह आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित कर रहा है। इस बीच, कई कर्मचारी संगठन खुद को इसके दायरे से बाहर रखे जाने पर गहरी नाराजगी जता रहे हैं। इसी क्रम में, मंगलवार को राजधानी भोपाल के नर्मदापुरम रोड स्थित मुख्य डाक भवन के सामने 'अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ' के बैनर तले प्रदेश भर के डाक सेवकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

📜 केंद्रीय मंत्री सिंधिया से हस्तक्षेप की मांग: '2.50 लाख ग्रामीण डाक सेवकों को भी मिले 8वें वेतनमान का लाभ'

प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर देश के 2.50 लाख से अधिक ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) के भविष्य और जीवन को सुरक्षित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग उठाई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन इसमें ग्रामीण डाक सेवकों को शामिल नहीं किया गया है। देश के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में डाक विभाग की रीढ़ बनकर काम करने वाले इन कर्मचारियों को इस नए वेतनमान से बाहर रखना उनके साथ सरासर अन्याय है। संघ ने पुरजोर मांग की है कि जीडीएस को तुरंत 8वें वेतन आयोग के दायरे में लाया जाए, ताकि उनके वेतन और भत्तों में सम्मानजनक सुधार हो सके।

👥 2.50 लाख परिवारों के भविष्य की सुरक्षा: नियमित कर्मचारियों के समान पेंशन और स्वास्थ्य लाभ देने की मांग

अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ के परिमंडल अध्यक्ष चंद्रभान सिंह पटेल ने संबोधित करते हुए कहा, "देश के 2.50 लाख से अधिक ग्रामीण डाक सेवक बेहद विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी करोड़ों ग्रामीण नागरिकों तक महत्वपूर्ण वित्तीय और डाक सेवाएं पहुंचा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज भी सामाजिक सुरक्षा, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है।" कर्मचारियों ने मांग की है कि सभी जीडीएस को नियमित विभागीय कर्मचारियों के समान ही पेंशन योजना, सीजीएचएस (CGHS) या ईएसआई (ESI) के तहत चिकित्सा व स्वास्थ्य लाभ प्रदान किए जाएं, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उनका व उनके परिवार का जीवन सुरक्षित हो सके।

🛑 अव्यावहारिक टारगेट और दमनकारी नीतियों पर रोक लगे: मांगें पूरी न होने पर काम बंद आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीण डाक कर्मचारियों ने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को भेजे गए ज्ञापन में अधिकारियों द्वारा निचले स्तर के कर्मचारियों पर थोपे जा रहे अव्यावहारिक और अत्यधिक 'बिजनेस टारगेट' को तुरंत बंद करने की मांग की है। इसके साथ ही संघ ने 'जीडीएस (आचरण एवं नियुक्ति) नियम 2020' को पूरी तरह वापस लेकर नया कर्मचारी-हितैषी नियम बनाने की वकालत की है। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके आर्थिक और सामाजिक हितों से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ और ये दमनकारी नीतियां वापस नहीं ली गईं, तो वे जल्द ही पूरे देश में काम बंद कर एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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