इंदौर से भोपाल पहुंचे जीतू पटवारी; अजान सुनकर रोका भाषण, पेपर लीक पर सरकार को घेरा
मप्र कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की साइकिल यात्रा भोपाल पहुंची। पेपर लीक, व्यापम और बंद स्कूलों के मुद्दे पर पटवारी और उमंग सिंघार ने मोहन सरकार को घेरा।
भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' राष्ट्रीय अभियान के तहत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की साइकिल साइक्लोथॉन (Cyclothon) यात्रा का बुधवार को दूसरा दिन रहा। इंदौर से शुरू होकर करीब 200 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर भोपाल पहुंचे जीतू पटवारी ने इस दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और संवेदनशीलता की एक बड़ी मिसाल पेश की। जब भोपाल में मंच से जनसभा को संबोधित करने की उनकी बारी आई, तभी पास की एक मस्जिद से अजान की आवाज गूंजने लगी। अजान का सम्मान करते हुए जीतू पटवारी ने करीब 3 मिनट तक अपना भाषण पूरी तरह रोक दिया और अजान समाप्त होने के बाद ही अपना संबोधन दोबारा शुरू किया।
📑 '90 बार पेपर लीक और 50 परीक्षाएं रद्द': व्यापम और पीएससी को लेकर जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर तीखा प्रहार
कांग्रेस द्वारा आयोजित इस 'इंदौर से भोपाल जेन-Z साइकिल यात्रा' के समापन पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया और विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार पर चौतरफा हमला बोला। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, "यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) के हमारे जांबाज साथियों ने 4 जिलों से गुजरते हुए 200 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा पूरी की है। हमारा उद्देश्य केवल एक है— राहुल गांधी जी द्वारा देश के युवाओं के सामने रखा गया नया नैरेटिव, जिसमें छात्रों की शिक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करना और एक निश्चित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू करना शामिल है।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि "मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान देश में रिकॉर्ड 90 बार सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं और 50 से अधिक बार महत्वपूर्ण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं। भविष्य अंधकार में देख युवा आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। मध्य प्रदेश में व्यापम और पीएससी (PSC) घोटालों ने प्रदेश के होनहार युवाओं का भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया है।"
🏥 डरे हुए प्रशासन ने अस्पतालों के पास दी प्रदर्शन की जगह: वाटर कैनन और गिरफ्तारी की चेतावनी पर बिफरे पटवारी
भोपाल जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए पटवारी ने कहा, "हमने लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने के लिए लिली टॉकीज, रेतघाट और जवाहर चौक जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की अनुमति मांगी थी, लेकिन डरे हुए और बौखलाए प्रशासन ने हमें जानबूझकर अस्पतालों के बीच प्रदर्शन की अनुमति दी, ताकि हमारा विरोध मुख्यमंत्री के निवास तक न पहुंच सके।" उन्होंने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "हम अस्पतालों के संवेदनशील संवेदनशील क्षेत्रों के पास वाटर कैनन (पानी की बौछारें) नहीं चलवाना चाहते थे, क्योंकि वहां गंभीर मरीज और एम्बुलेंस आती-जाती हैं। अगर प्रशासन में हिम्मत है, तो हमें सीधे गिरफ्तार करे, लेकिन पुलिस के बल पर जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। एक दिन प्रदेश की पीड़ित जनता मुख्यमंत्री आवास का घेराव जरूर करेगी।" उन्होंने मांग की कि मध्य प्रदेश में केजी (KG) से लेकर पीजी (PG) तक हर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए।
🏫 'मप्र में बंद हुए 10,000 सरकारी स्कूल': नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप; 9 अगस्त को 'संसद चलो' का आह्वान
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। सिंघार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "मध्य प्रदेश के अंदर भाजपा के कुशासन में अब तक 10 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश और प्रदेश के पीड़ित छात्रों के 'मन की बात' सुनना ही नहीं चाहते, वे सिर्फ रेडियो पर अपनी एकतरफा बात थोपते हैं।" सिंघार ने आगे कहा कि "प्रधानमंत्री केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और आरएसएस (RSS) के एजेंडे को सुनते हैं, जबकि देश का आम छात्र केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षाएं चाहता है।" उन्होंने युवाओं से आगामी 9 अगस्त 2026 को राहुल गांधी के नेतृत्व में होने वाले 'संसद चलो' राष्ट्रीय आंदोलन से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने की अपील की।
इसी सभा में कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि "मोदी सरकार ने धर्म को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया और देश की प्रमुख स्वायत्त व सरकारी संस्थाओं को संघ के सामने झुका दिया है। नीट (NEET) और सीबीएसई (CBSE) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के टेंडर तक अपात्र लोगों को बांटे जा रहे हैं।" वहीं, भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि "देश में 21 से ज्यादा होनहार छात्रों ने परीक्षा घोटालों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में मानसिक अवसाद के कारण अपनी जान गंवा दी है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की शिक्षा की अलख से हमेशा से एक खास सोच रखने वालों को तकलीफ रही है, और दबे-कुचलों के अधिकार की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।"
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