भोपाल पुलिस की नाक के नीचे से चोरी हुई स्कूटी, पीड़ित ने हनुमानगंज थाने के आरक्षक पर लगाए गंभीर आरोप

भोपाल में पुलिस चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा चाबी जब्त करने के बाद स्कूटी चोरी होने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर से की शिकायत।

Jul 16, 2026 - 13:42
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भोपाल पुलिस की नाक के नीचे से चोरी हुई स्कूटी, पीड़ित ने हनुमानगंज थाने के आरक्षक पर लगाए गंभीर आरोप

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वाहन चेकिंग के दौरान सीधे पुलिस की नाक के नीचे चोरी का एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। चोरी की इस सनसनीखेज वारदात ने भोपाल पुलिस की मुस्तैदी और उनकी कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित का आरोप है कि चेकिंग के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी ने उसकी स्कूटी रुकवाकर उसकी चाबी जबरन अपने कब्जे में ले ली, लेकिन कुछ ही देर बाद वही स्कूटी एक अज्ञात युवक पुलिसकर्मियों के सामने से ही लेकर फरार हो गया। पीड़ित का दावा है कि यह पूरी घटना मौके पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में भी साफ तौर पर कैद हो गई है। वहीं, इस अजीबोगरीब चोरी की शिकायत दर्ज कराने के लिए पीड़ित को चार अलग-अलग थानों की खाक छाननी पड़ी।

मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल में इन दिनों सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर वाहनों की सख्ती से चेकिंग की जा रही है। इसी अभियान के तहत सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर यह अजीबोगरीब घटना घटी। पीड़ित नदीम आलम (निवासी ललारिया, तहसील बैरसिया) ने पुलिस कमिश्नर को दिए लिखित आवेदन में बताया कि उसकी सुजुकी की स्कूटी को 13 जुलाई की रात करीब 8 बजे उसके बहनोई मोहम्मद सगीर चला रहे थे। सगीर जब सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे से इब्राहिमपुरा की ओर जा रहे थे, तभी वहां पुलिस की वाहन चेकिंग चल रही थी। ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी स्कूटी रोकी और आरक्षक ने चाबी अपने पास रख ली व ₹300 का चालान बना दिया। सगीर के पास उस समय चालान भरने के लिए नकद पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपने साले नदीम आलम को पैसे लेकर मौके पर बुलाया। आरोप है कि इसी बीच जब सगीर पैसे का इंतजार कर रहे थे, तभी एक अज्ञात युवक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में स्कूटी लेकर वहां से रफूचक्कर हो गया।

पीड़ित नदीम का आरोप है कि जब वह पैसे लेकर मौके पर पहुंचा और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से अपनी गाड़ी के बारे में पूछा, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उल्टा एक पुलिसकर्मी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उपहास उड़ाते हुए कहा, "चाचा, अब तुम्हारी गाड़ी गई।" शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिसकर्मी के इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से यह गहरा संदेह पैदा होता है कि वाहन ले जाने वाले अज्ञात व्यक्ति के बारे में उस पुलिसकर्मी को पहले से जानकारी थी।

👮 एफआईआर (FIR) के लिए थानों की दौड़: चार थानों के चक्कर काटने को मजबूर हुआ पीड़ित, आरक्षक दिनेश डेहरिया ने आरोपों को नकारा

इस घटना के बाद पीड़ित नदीम अपनी स्कूटी चोरी की एफआईआर दर्ज कराने के लिए भटकता रहा। वह शिकायत लेकर क्रमशः मंगलवारा, तलैया, हनुमानगंज और गौतम नगर थाने पहुंचा, लेकिन हर थाने की पुलिस ने घटना स्थल के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का हवाला देते हुए मामला दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, ट्रैफिक पुलिस ने भी इस संबंधित चेकिंग अभियान से खुद को पूरी तरह अलग बता दिया।

पीड़ित की लिखित शिकायत में जिस आरक्षक पर मुख्य रूप से सवाल उठाए गए हैं, उसका नाम दिनेश डेहरिया बताया जा रहा है, जो वर्तमान में हनुमानगंज थाने में पदस्थ है। हालांकि, आरोपी आरक्षक दिनेश ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आरक्षक का कहना है कि उन्होंने किसी भी अज्ञात व्यक्ति को स्कूटी की चाबी नहीं सौंपी थी। उनके अनुसार, चाबी पहले से ही वाहन के लॉक में लगी हुई थी और भीड़ व चेकिंग की व्यस्तता का फायदा उठाकर कोई अज्ञात युवक स्कूटी चालू करके भाग खड़ा हुआ। दूसरी ओर, मंगलवारा थाना प्रभारी अजय सोनी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया, "यह घटना हमारे ही थाना क्षेत्र की है। पीड़ित की शिकायत को संज्ञान में ले लिया गया है और पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और सीसीटीवी फुटेज सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।"

⚖️ नियमों के उल्लंघन और जांच का दायरा: क्या आरक्षक पर दर्ज होगा केस? रिटायर्ड डीजी मैथिलीशरण गुप्त ने उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर और पुलिस की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए मध्य प्रदेश के रिटायर्ड डीजी मैथिलीशरण गुप्त ने कहा, "पुलिस को विशेष और असाधारण परिस्थितियों में ही किसी वाहन को जब्त करने या उसकी चाबी लेने का कानूनी अधिकार है। लेकिन सामान्य चेकिंग के दौरान वाहन चालक से चाबी जबरन निकाल लेना या अपने पास रख लेना पुलिस मैनुअल और नियमों के सर्वथा विपरीत है।" उन्होंने कहा कि यदि विभागीय जांच में पीड़ित द्वारा शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित आरक्षक के खिलाफ गंभीर लापरवाही और कर्तव्य में कोताही बरतने का मामला दर्ज कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, पीड़ित नदीम आलम ने भोपाल पुलिस कमिश्नर से इस पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उसकी चोरी गई स्कूटी को जल्द से जल्द बरामद कर वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

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