कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन पर छिड़ा घमासान; SDO और रेंजर की मिलीभगत से टेंडर में हेराफेरी का आरोप
कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन (बकरों की खरीद) में करोड़ों के घोटाले का आरोप। 30 किलो के बकरे को 90 किलो दिखाकर भुगतान करने के मामले में ग्वालियर EOW में शिकायत।
श्योपुर। देश-विदेश में अपनी अनूठी पहचान बना चुके मध्य प्रदेश के कूनो चीता प्रोजेक्ट (Kuno Cheetah Project) पर अब भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लग रहे हैं. श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन के लिए खरीदे जाने वाले बकरों की खरीद, उनके वजन और टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेराफेरी को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ग्वालियर में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है. शिकायतकर्ता कांग्रेस नेता मोहम्मद चीनी कुरैशी का दावा है कि इस पूरे मामले में वन्यजीवों के संरक्षण के नाम पर मिलने वाले करोड़ों रुपये के सरकारी फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और बंदरबांट किया गया है.
🐐 2. टेंडर के दामों में भारी विसंगति: सालों-साल घटती गई बकरों की सरकारी खरीद दर
ग्वालियर EOW में प्रस्तुत किए गए शिकायती दस्तावेजों के अनुसार, चीतों के दैनिक भोजन के लिए खरीदे जाने वाले बकरों और पाड़ों (भैंस के बच्चे) की खरीद में नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया है.
वर्षवार स्वीकृत टेंडर और खरीद दरों का पूरा ब्योरा:
वर्ष 2022-23: इस अवधि के दौरान बिना किसी पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के 700 रुपये प्रति किलो की अत्यधिक दर से बकरों की खरीद की गई.
वर्ष 2024-25: टेंडर प्रक्रिया के तहत दर थोड़ी कम होकर 699 रुपये प्रति किलो पर स्वीकृत की गई.
वर्ष 2025-26: इसके बाद बकरों की खरीद दर अचानक गिरकर 499 रुपये प्रति किलो हो गई.
वर्ष 2026-27: वर्तमान वित्तीय वर्ष में यही टेंडर घटकर महज 421 रुपये प्रति किलो की दर पर स्वीकृत हुआ है.
शिकायतकर्ता चीनी कुरैशी का तर्क है कि जब शिकायतें सामने आईं, तो खरीद की दर 700 रुपये से घटकर सीधे 421 रुपये प्रति किलो पर आ गई. यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि शुरुआती वर्षों में बिना टेंडर के अत्यंत ऊंचे दामों पर खरीद कर सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया गया था.
⚖️ 3. 30 किलो के बकरे को कागजों पर दिखाया 90 किलो: फर्जी वजन दिखाकर भुगतान करने का आरोप
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर आरोप बकरों के जीवित वजन (Live Weight) को लेकर लगाया गया है.
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वजन में भारी हेराफेरी: शिकायतकर्ता का आरोप है कि सामान्यतः एक सामान्य और स्वस्थ जीवित बकरे का वजन अधिकतम 15 से 30 किलोग्राम के बीच होता है. लेकिन कूनो नेशनल पार्क के सरकारी रिकॉर्ड्स और बिलों में इन्हें 70 से लेकर 90 किलोग्राम तक का दर्शाकर भारी-भरकम भुगतान उठाया जा रहा है.
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अधिकारियों की कथित मिलीभगत: आरोप लगाया गया है कि यदि बकरे की वास्तविक खरीद 700 रुपये प्रति किलो के हिसाब से होती है, तो एक 30 किलो के बकरे की कीमत लगभग 21 हजार रुपये होनी चाहिए. लेकिन अधिकारियों ने कागजों पर बकरों का वजन कई गुना अधिक दिखाकर इस राशि का गबन किया. इस संदिग्ध खेल में कूनो के एसडीओ (SDO), रेंजर, डिप्टी रेंजर और वर्तमान सप्लायर की कथित मिलीभगत बताई जा रही है.
💬 4. राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप: कांग्रेस का निष्पक्ष जांच का दबाव, बीजेपी बोली- 'दोषियों पर होगी कार्रवाई'
इस मामले के उजागर होने के बाद श्योपुर से लेकर भोपाल तक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. कांग्रेस के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दौलतराम गुप्ता ने भी कड़े शब्दों में आरोप लगाते हुए कहा है कि चीतों के भोजन की आड़ में कूनो नेशनल पार्क में करोड़ों का भारी भ्रष्टाचार हुआ है. इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व सप्लायरों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिला अध्यक्ष शशांक भूषण ने इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है, "यदि वन्यजीव परियोजना में इस प्रकार की कोई वित्तीय अनियमितता हुई है, तो सरकार इसकी निश्चित रूप से जांच कराएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी." वहीं, बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेंद्र जाट ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस ने शिकायत दर्ज कराई है, तो कूनो मैनेजमेंट के इन गंभीर आरोपों और पेश किए गए सभी तथ्यों की गहनता से जांच की जानी चाहिए.
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