प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगी एमपी की आंगनबाड़ियां! ₹6 लाख के खर्च से हर केंद्र बनेगा 'स्मार्ट पाठशाला'

उज्जैन की 1000 आंगनबाड़ियों को ₹60 करोड़ की लागत से स्मार्ट प्री-स्कूल में बदला जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत शुरू हुए इस बड़े अभियान की पूरी जानकारी।

Jul 17, 2026 - 16:36
0
प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगी एमपी की आंगनबाड़ियां! ₹6 लाख के खर्च से हर केंद्र बनेगा 'स्मार्ट पाठशाला'

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में आंगनबाड़ियां जल्द ही एक नए और आधुनिक रूप में नजर आएंगी. अब तक जहां आंगनबाड़ियां केवल पोषण, टीकाकरण और प्राथमिक देखभाल तक ही सीमित थीं, वहीं मध्य प्रदेश सरकार इन्हें बच्चों की पहली 'स्मार्ट पाठशाला' बनाने का प्रयास कर रही है. राज्य सरकार के निर्देशन में आईआईएम (IIM) बेंगलुरु, महिला एवं बाल विकास विभाग और नोवल सोशल फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से 'हैप्पी आंगन ऑफ सिंहस्थ' अभियान की शुरुआत की गई है. इसे प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (Early Childhood Education) की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.

💰 2. हर आंगनबाड़ी पर खर्च होंगे 6 लाख रुपये: 1000 केंद्रों का लक्ष्य, सदावल में पहली मॉडल पाठशाला तैयार

इस बड़े अभियान के तहत उज्जैन जिले की लगभग 1,000 आंगनबाड़ियों को 60 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से आधुनिक स्मार्ट प्री-स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है. योजना के मुताबिक, हर एक आंगनबाड़ी केंद्र के कायाकल्प पर करीब 6 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे.

  • पहली मॉडल आंगनबाड़ी का लोकार्पण: इस अभियान के तहत पहली मॉडल 'स्मार्ट और हैप्पी आंगनबाड़ी' उज्जैन के सदावल गांव में बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी है. इसका लोकार्पण हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था, जो अब जिले के अन्य केंद्रों के लिए एक रोल मॉडल बनेगी.

  • वेस्ट टू बेस्ट की अनूठी सोच: इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें कबाड़ से जुगाड़ यानी 'वेस्ट टू बेस्ट' की सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है. अनुपयोगी और रीसायकल की जा सकने वाली सामग्रियों का उपयोग कर बच्चों के लिए आकर्षक, सुरक्षित एवं रचनात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है.

🎯 3. नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत समग्र विकास: बच्चों को मिलेगा प्राइवेट स्कूलों जैसा वर्ल्ड क्लास माहौल

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी बृजेश त्रिपाठी ने इस परियोजना के दूरगामी उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए बताया:

"यह परियोजना केवल आंगनबाड़ी भवनों के रंग-रोगन या सौंदर्यीकरण तक ही सीमित नहीं है. बल्कि यह नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप आंगनबाड़ियों को बच्चों के समग्र और सर्वांगीण विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने का एक बड़ा प्रयास है. यहां बच्चों की शुरुआती शिक्षा, खेल, पोषण, स्वास्थ्य और मानसिक विकास को एक साथ जोड़ा गया है. हम बच्चों को वैसा ही शानदार माहौल दे रहे हैं, जैसा किसी महंगे और नामचीन प्राइवेट प्री-स्कूल में मिलता है."

स्मार्ट आंगनबाड़ियों की मुख्य विशेषताएं: इन नए केंद्रों में बच्चों को आकर्षित करने वाली थीम-आधारित कक्षाएं, बच्चों के शारीरिक अनुकूल मॉडर्न फर्नीचर, खेल-खेल में शिक्षा देने वाले आधुनिक उपकरण, झूले, सुरक्षित प्ले एरिया, आकर्षक यूनिफॉर्म, नियमित मेडिकल चेकअप की सुविधाएं और बेहतर व स्वच्छ पोषण व्यवस्था जैसी बाल-अनुकूल सुविधाएं दी जा रही हैं.

🤝 4. CSR मॉडल और जनभागीदारी की ताकत: कोई भी संस्था या व्यक्ति ले सकता है आंगनबाड़ी गोद

नोवल सोशल फाउंडेशन के संस्थापक संजीव दुबे ने बताया कि सरकारी आंगनबाड़ियों के सामने हमेशा से सबसे बड़ी चुनौती बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक संसाधनों की कमी रही है. नई शिक्षा नीति के मापदंडों के अनुसार इन्हें समय रहते प्री-स्कूल में बदलना बेहद जरूरी था. इसी विजन के साथ उज्जैन की 1,000 आंगनबाड़ियों का पूरी तरह से ट्रांसफॉर्मेशन किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि समाज के हर तबके के बच्चे को उसकी पहली पाठशाला में ऐसा वातावरण मिले, जो उसके सीखने की ललक के साथ-साथ उसकी जिज्ञासा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दे सके.

  • कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR): यह पूरी परियोजना पूरी तरह से CSR मॉडल पर आधारित है.

  • गोद लेने की व्यवस्था: देश या प्रदेश का कोई भी उद्योग, व्यावसायिक संस्था, सामाजिक संगठन अथवा सक्षम व्यक्ति एक या अधिक आंगनबाड़ियों को गोद ले सकता है. इस अभियान को सफल बनाने में स्थानीय जनभागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत साबित हो रही है.

🇮🇳 5. देश के लिए नजीर बनेगा उज्जैन का यह प्रोजेक्ट: एक साथ संचालित होंगी 1000 स्मार्ट आंगनबाड़ियां

फाउंडेशन के संजीव दुबे का कहना है कि यदि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाता है, तो उज्जैन पूरे देश का पहला ऐसा जिला बनने का गौरव हासिल करेगा, जहां एक साथ 1,000 स्मार्ट आंगनबाड़ियां सुचारू रूप से संचालित होंगी. सामूहिक प्रयासों और आधुनिक दृष्टिकोण से तैयार किया जा रहा यह बेहतरीन मॉडल न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि भारत के अन्य सभी राज्यों के लिए भी प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी और अनुकरणीय उदाहरण साबित होगा.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User