हैदराबाद से जबलपुर लाए गए रेस के घोड़ों की मौत का मामला; हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, केयरटेकर ने बेचे 22 घोड़े

हैदराबाद से जबलपुर लाए गए रेस के घोड़ों की मौत और अवैध बिक्री मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पशु अधिकारी व पुलिस को फार्म हाउस की जांच के निर्देश।

Jul 17, 2026 - 15:00
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हैदराबाद से जबलपुर लाए गए रेस के घोड़ों की मौत का मामला; हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, केयरटेकर ने बेचे 22 घोड़े

जबलपुर। तेलंगाना के हैदराबाद से जबलपुर लाए गए रेस के घोड़ों की रहस्यमयी मौत और उनकी देखरेख में की गई गंभीर लापरवाही के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक बार फिर तीखी सुनवाई हुई है. यह याचिका जबलपुर की स्थानीय पशु प्रेमी सिमरन इस्सर द्वारा दायर की गई थी. याचिका में बताया गया है कि वर्ष 2025 में जबलपुर के केयरटेकर सचिन तिवारी कुल 57 घोड़ों को हैदराबाद से गुपचुप तरीके से लाकर पनागर के रैपुरा स्थित एक फार्म हाउस में रखे हुए थे. इस बेहद संवेदनशील गतिविधि की जानकारी न तो स्थानीय जिला प्रशासन को दी गई थी और न ही पशुपालन विभाग को. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बाद घोड़ों की बुनियादी खुराक और चिकित्सा में की गई घोर लापरवाही के चलते अब तक 19 घोड़ों की तड़प-तड़पकर मौत हो चुकी है.

📱 2. 'हॉर्स पावर लीग' और फिलीपींस ऑनलाइन सट्टेबाजी का कनेक्शन: ऐसे हुआ करोड़ों का खेल

हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय कड़ियों के खुलासे हुए.

ऑनलाइन सट्टेबाजी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में अनावेदक और घोड़ों के असली मालिक हैदराबाद निवासी सुरेश पाल गुड्डू हैं, जो वहां 'हॉर्स पावर लीग' (Horse Power League) चलाते हैं. हैदराबाद रेस क्लब में घोड़ों की रेस कराकर वे 'ट्रोपंग करेरिस्ता' (Tropang Karerista) नामक मोबाइल ऐप के माध्यम से फिलीपींस में इसकी लाइव स्ट्रीमिंग करते थे और वहां बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टा लगवाते थे. फिलीपींस सरकार की आधिकारिक शिकायत और जांच के बाद इस सट्टा रैकेट और ऐप को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था.

💀 3. साक्ष्य छिपाने के लिए हैदराबाद से जबलपुर शिफ्ट किए गए 57 घोड़े: देखरेख में घोर लापरवाही

प्रतिबंध से पहले सुरेश पाल गुड्डू के पास 150 से अधिक रेस के घोड़े थे. लेकिन कानूनी कार्रवाई और वित्तीय तंगी के बाद उन्होंने घोड़ों की देखरेख करने वाले अस्तबल के कर्मचारियों को वेतन देना बंद कर दिया. इसके चलते घोड़ों की खुराक और इलाज में बड़ी लापरवाही हुई, जिससे हैदराबाद में ही लगभग 90 घोड़ों की दर्दनाक मौत हो गई.

  • जबलपुर में साक्ष्य छुपाने का प्रयास: हैदराबाद में हुई इन मौतों और अवैध गतिविधियों के साक्ष्यों को पुलिस व प्रशासन से छिपाने के उद्देश्य से आनन-फानन में बचे हुए 57 घोड़ों को चोरी-छिपे जबलपुर के रैपुरा स्थित फार्म हाउस में लाकर शिफ्ट कर दिया गया.

  • जबलपुर में भी मौतें जारी: जबलपुर लाने के बाद भी इन बेजुबानों की किस्मत नहीं बदली और पर्याप्त आहार न मिलने के कारण यहाँ भी घोड़ों की मौतों का सिलसिला लगातार जारी रहा.

🔍 4. केयरटेकर सचिन तिवारी ने बेचे 22 घोड़े: हाईकोर्ट ने दिए पुलिस और पशु अधिकारी के साथ औचक निरीक्षण के आदेश

सुनवाई के दौरान जबलपुर में घोड़ों की देखरेख कर रहे केयरटेकर सचिन तिवारी ने कोर्ट के समक्ष यह स्वीकार किया कि हैदराबाद से लाए गए 57 घोड़ों में से 19 की मौत हो चुकी है. इसके साथ ही उसने यह भी कबूल किया कि उसने इनमें से 22 बेशकीमती घोड़े आगे बेच दिए हैं और केवल तीन नए घोड़े खरीदे हैं. वर्तमान में फार्म हाउस पर केवल 19 घोड़े बचे हैं, जिनकी खुराक और स्वास्थ्य पर अब ध्यान दिया जा रहा है.

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और निर्देश: याचिकाकर्ता सिमरन इस्सर ने केयरटेकर द्वारा कोर्ट की अनुमति के बिना घोड़ों को अवैध रूप से बेचे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने बेचे गए घोड़ों की स्थिति और फार्म हाउस पर मौजूद अव्यवस्थाओं की तत्काल स्वतंत्र जांच की मांग की. हाईकोर्ट ने इस मांग को तुरंत स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता, जबलपुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी और संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी (TI) के साथ संयुक्त रूप से फार्म हाउस जाकर औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर रिपोर्ट सौंपें. कोर्ट ने इस गंभीर मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई 2026 को तय की है.

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