गुना के युवाओं की अनोखी पहल; पिछले 5 सालों से हर रविवार गरीबों को करा रहे हैं 'पंगत' में भरपेट भोजन
गुना में युवाओं की एक टोली पिछले 5 वर्षों से लगातार हर रविवार जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन करा रही है। अंतिम संस्कार से लेकर इलाज तक, जानें इनकी सामाजिक पहल।
गुना। कहते हैं कि ऐसा जीवन किस काम का जो सिर्फ अपने लिए ही जीया जाए. प्यासे को पानी पिलाना और भूखे को भोजन कराना सृष्टि का सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है. मध्य प्रदेश के गुना जिले में पिछले 5 वर्षों से युवाओं का एक समर्पित समूह इस सीख को हकीकत में बदल रहा है. युवाओं की यह टोली असहाय, गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा में हमेशा सबसे आगे रहती है. यह टोली हर रविवार को शहर के बेसहारा लोगों के लिए 'पंगत' (सामूहिक भोज) का आयोजन करती है. इस पंगत में भोजन करने के लिए शहर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद लोग आते हैं और सम्मानपूर्वक भोजन ग्रहण करते हैं.
🍲 2. स्टेशन रोड पर शुरू की 'भोजनशाला': पूरी, सब्जी और रायते के साथ परोसा जाता है स्वादिष्ट भोजन
युवाओं की इस नि:स्वार्थ जनसेवा की मुहिम में अब शहरवासी भी बढ़-चढ़कर अपना योगदान दे रहे हैं.
कोरोना काल के संकट में रखी गई थी नींव:
इस ऐतिहासिक मुहिम की शुरुआत कोरोना महामारी और लॉकडाउन के अत्यंत कठिन दौर में इन युवाओं द्वारा की गई थी, जो बिना रुके आज भी अनवरत जारी है. कोरोना काल में जब चारों तरफ संकट था, तब इन युवाओं ने घर-घर जाकर उन लोगों तक भोजन पहुंचाया जो भूख से व्याकुल थे. इसी सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए संगठन ने गुना के स्टेशन रोड पर एक स्थाई 'भोजनशाला' की शुरुआत की है. यहाँ प्रत्येक रविवार को पूरी, स्वादिष्ट सब्जी, पापड़, सलाद और रायता जैसे व्यंजनों के साथ पौष्टिक व स्वादिष्ट भोजन परोसा जाता है.
🩺 3. केवल भोजन ही नहीं, गरीबों के इलाज से लेकर अंतिम संस्कार और बेटियों की शिक्षा में भी मददगार
इस भोजनशाला की एक और खूबसूरत विशेषता यह है कि यहाँ शहर के लोग अपने बच्चों का जन्मदिन, शादी की सालगिरह या पूर्वजों की पुण्यतिथि बेहद सादगी से मनाते हैं. इस सेलिब्रेशन के तहत लोग भोजनशाला में आकर गरीबों को अपनी ओर से भोजन कराते हैं.
युवाओं की इस समिति का कार्य केवल भोजन कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इनके सामाजिक कार्यों का दायरा बहुत बड़ा है:
| सेवा का क्षेत्र | मुख्य कार्य एवं गतिविधियां |
| अंतिम संस्कार सहायता | अत्यंत गरीब और लावारिस शवों के ससम्मान अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था करना. |
| बाल शिक्षा सहयोग | निर्धन स्कूली बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए कॉपियां, किताबें और अन्य पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना. |
| महिला स्वास्थ्य | ग्रामीण और गरीब बस्तियों की महिलाओं व किशोरियों के लिए सैनिटरी पैड्स का नियमित वितरण. |
| वस्त्र और चिकित्सा | जरूरतमंदों को मौसम के अनुकूल कपड़े बांटना और गरीब बीमार लोगों के इलाज व दवाइयों की व्यवस्था करना. |
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