प्रतिमा बागरी जाति विवाद में नया मोड़, कांग्रेस का आरोप- सरकार के दबाव में समिति ने दी क्लीन चिट

राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को वैध ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस हाईकोर्ट जाएगी। कांग्रेस ने लगाया सरकार के दबाव में क्लीन चिट देने का आरोप।

Jul 17, 2026 - 17:18
0
प्रतिमा बागरी जाति विवाद में नया मोड़, कांग्रेस का आरोप- सरकार के दबाव में समिति ने दी क्लीन चिट

भोपाल। अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को राज्य स्तरीय छानबीन समिति द्वारा वैध ठहराए जाने के बाद भी मध्य प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं दे रही हैं. उच्च स्तरीय छानबीन समिति के इस फैसले को कांग्रेस ने पूरी तरह सरकार के दबाव में लिया गया निर्णय बताया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष और इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में आकर उच्च स्तरीय जांच समिति ने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व शासकीय दस्तावेजों की अनदेखी करते हुए मंत्री को क्लीन चिट दी है. कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि समिति के इस फैसले को जल्द ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

🗣️ 2. मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रभावित हुई जांच: कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार का संगीन आरोप

शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए सरकार और जांच समिति पर सीधे आरोप लगाए. उन्होंने कहा:

"जांच प्रक्रिया के दौरान जब मामला समिति के पास लंबित था, तब मंत्री प्रतिमा बागरी अन्य कैबिनेट मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने गई थीं. इस मुलाकात के तुरंत बाद ही जांच की पूरी दिशा को प्रभावित कर दिया गया."

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि समिति ने संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश 1950, वर्ष 1961 व 1971 की जनगणना के रिकॉर्ड, ट्रायबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) की 1998-99 की मानवशास्त्रीय रिपोर्ट और साल 2007 के शासकीय राजपत्र (Gazette) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और अकाट्य दस्तावेजों को अपने निर्णय में कोई उचित महत्व ही नहीं दिया.

📄 3. गलत तथ्यों और दस्तावेजों की अनदेखी पर टिकी क्लीन चिट: कांग्रेस ने प्रस्तुत किए आंकड़े
  • भौगोलिक सीमा का तर्क: कांग्रेस नेता का दावा है कि जांच समिति पूरी तरह से गलत तथ्यों और भ्रामक दलीलों के आधार पर इस निष्कर्ष तक पहुंची है. यदि 1950 के अनुसूचित जाति आदेश का बारीकी से अध्ययन किया जाए, तो प्रतिमा बागरी जिस तत्कालीन भौगोलिक क्षेत्र में रहती थीं, वहां बागरी समुदाय अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल ही नहीं था.

  • जनगणना रिकॉर्ड की अनदेखी: इसके अलावा, 1961 और 1971 की राष्ट्रीय जनगणना के दौरान भी उनके परिवार ने स्वयं को अनुसूचित जाति वर्ग में दर्ज नहीं कराया था.

  • अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट: ट्रायबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) की प्रामाणिक रिपोर्ट में भी स्पष्ट उल्लेख है कि विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र का बागरी समुदाय वास्तव में राजपूत ठाकुर की ही एक उपजाति है.

🏛️ 4. सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी कानूनी लड़ाई: 'बचाव समिति' की तरह काम करने का आरोप

कांग्रेस ने कड़े शब्दों में कहा कि राज्य स्तरीय छानबीन समिति के इस त्रुटिपूर्ण फैसले को न केवल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर पार्टी इस लड़ाई को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक लेकर जाएगी. कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जांच समिति ने इस पूरे मामले में एक निष्पक्ष प्राधिकारी के बजाय मंत्री की 'बचाव समिति' की तरह काम किया है. प्रभावशाली मंत्री को बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण शासकीय व ऐतिहासिक दस्तावेजों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है, जिसे अदालत के सामने उजागर किया जाएगा.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User