धार भोजशाला के पास नमाज के लिए 'खुली जगह' तलाश रहा प्रशासन; हिंदू पक्ष ने उठाई कड़ी आपत्ति
धार भोजशाला परिसर के पास नमाज के लिए खुली जगह देने के कोर्ट के आदेश के बाद विवाद गरमाया। हिंदू पक्ष ने 300 मीटर संरक्षित दायरे से बाहर नमाज की मांग की।
धार। मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धार भोजशाला को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से पहले ही 'मंदिर' होने की अपनी कानूनी पहचान मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद इससे जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब परिसर के पास नमाज अदा करने के लिए 'ओपन स्पेस' (खुली जगह) आवंटित किए जाने के अदालती आदेश के बाद एक बार फिर धार भोजशाला चर्चा के केंद्र में आ गई है. जहां एक ओर मुस्लिम पक्ष भोजशाला मंदिर के नजदीक नमाज अदा करने के लिए प्रशासन से उचित स्थान की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हिंदू पक्ष ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि भोजशाला परिसर के संरक्षित 300 मीटर के दायरे के बाहर मुस्लिम समाज के लोग कहीं भी नमाज अदा कर सकते हैं. हिंदू पक्ष का यह भी तर्क है कि भोजशाला के ठीक बाहर पूर्व में कब्रिस्तान बनाए जाने के कारण मुस्लिम पक्ष स्वयं ही यहां पहले नमाज पढ़ने से इनकार कर चुका है, ऐसे में अब दोबारा इसी स्थान के पास जगह मांगना गहरी चिंता का विषय है.
📜 2. 'Adjacent' और 'Nearby' शब्दों के अर्थ में उलझा प्रशासन: क्या कब्रिस्तान के पास मिलेगी जगह?
इस पूरे मामले में माननीय न्यायालय के आदेश में प्रयुक्त तकनीकी शब्दों पर जिला प्रशासन बारीकी से विचार कर रहा है. कोर्ट के आदेश में नमाज के लिए अलग से एक खुली जगह (Open Space) मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि, इस आदेश में 'Adjacent' (सटा हुआ) और 'Nearby' (आसपास) जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है.
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Adjacent (सटा हुआ): इसका अर्थ है भोजशाला परिसर की सीमा से ठीक सटा हुआ क्षेत्र. स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए बिल्कुल सटकर जमीन दिए जाने की संभावना बेहद कम है, क्योंकि भोजशाला के बाहर मुस्लिम पक्ष द्वारा कब्रिस्तान बनाया गया है और हिंदू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम समाज कब्रिस्तान में नमाज अदा नहीं करता है.
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Nearby (आसपास): इसका अर्थ परिसर के आसपास का इलाका है. इस शब्द की सीमा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं होने के कारण दूरी का अंतिम निर्णय अब पूरी तरह से जिला प्रशासन के पाले में है.
इसके अतिरिक्त, आदेश में 'Ad-hoc' (तदर्थ) शब्द का भी प्रयोग किया गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से अस्थायी और अंतरिम है.
🔱 3. "जब मंदिर मान लिया तो फिर विवाद क्यों?" - हिंदू पक्ष ने उठाए मुस्लिम पक्ष की मांग पर गंभीर सवाल
इस बीच भोजशाला समिति व हिंदू पक्ष के वरिष्ठ नेता गोपाल शर्मा ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है:
भोजशाला समिति के नेता गोपाल शर्मा का बयान: "माननीय सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों ने ही धार भोजशाला को मंदिर स्वीकार किया है और मई में ही इस पर अंतिम फैसला सुनाया जा चुका है. जब कोर्ट ने इसे मंदिर मान लिया है, तो मुस्लिम पक्ष को जो वैकल्पिक स्थान दिया जा रहा है, उन्हें वहां नमाज अदा करनी चाहिए. भोजशाला परिसर का 300 मीटर का दायरा पूरी तरह से संरक्षित क्षेत्र है, ऐसे में इसके भीतर नमाज की जगह की जिद क्यों की जा रही है? शहर की शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए उन्हें कोर्ट के निर्देशों का पालन करना चाहिए. उन लोगों ने पहले ही यहां चारों तरफ कब्रिस्तान बना रखा है, जहां केवल फातिहा पढ़ा जा सकता है, नमाज नहीं. इसी बात का हवाला देकर पूर्व में बसंत पंचमी पर उन्होंने यहां नमाज अदा नहीं की थी क्योंकि उनका कहना था कि वे कब्रिस्तान में नमाज नहीं पढ़ेंगे. जब उनके अपने धार्मिक नियमों (कुरान) के अनुसार भी कब्रिस्तान में नमाज कुबूल नहीं होती, तो उन्हें स्वयं ही इस 300 मीटर के दायरे से दूर नमाज अदा करनी चाहिए."
🕌 4. "हमें नमाज से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन मंदिर के समीप यह मांग अनुचित" - भोज उत्सव समिति
भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के फैसले को यथावत रखते हुए धार भोजशाला को मंदिर घोषित किया जा चुका है. ऐसे में मंदिर के ठीक समीप नमाज की मांग करना तर्कसंगत नहीं है. इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1935 में भी जब ऐसी ही मांग उठी थी, तब धार रियासत के तत्कालीन महाराजा ने मुस्लिमों के लिए अलग से 'रहमत मस्जिद' का निर्माण करवाया था. इसके बावजूद बार-बार परिसर के पास नमाज की मांग करना विवाद को जन्म देने जैसा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें मुस्लिम समाज की नमाज से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए उन्हें परिसर से 300 मीटर दूर किसी भी अन्य उचित स्थान पर नमाज अदा करनी चाहिए.
💬 5. "हम आदेश का अध्ययन कर रहे हैं, दूर जाकर नमाज नहीं पढ़ेंगे" - मुस्लिम पक्ष
दूसरी ओर, इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता और मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा:
"कोर्ट का लिखित आदेश आज सुबह ही लगभग 10 बजे अपलोड हुआ है, जिसका अध्ययन समाज के प्रबुद्ध लोगों द्वारा किया जा रहा है. हम समाज के लोगों तक कोर्ट के निर्देशों का संदेश पहुंचा रहे हैं और प्रशासन से भी लगातार संपर्क में हैं. हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि नमाज अदा की जाए, लेकिन हम कोर्ट के आदेशों का भी अध्ययन कर रहे हैं. हम अपने तय परिसर (प्रिमाइसेस) या नमाज के पारंपरिक स्थान से बहुत दूर जाकर नमाज नहीं पढ़ेंगे. जिला कलेक्टर ने हम सभी याचिकाकर्ताओं और पक्षकारों को एक बैठक के लिए आमंत्रित किया है, जहां हम प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखेंगे. हमें हाईकोर्ट के मूल आदेश में भी कुछ विसंगतियां नजर आई थीं, जिन्हें हमने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है."
🤝 6. प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दोहरी चुनौती: जिला कलेक्टर का बयान
फिलहाल धार जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर असमंजस और बेहद सतर्कता की स्थिति में है. प्रशासन को कोर्ट के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए एक ऐसी सर्वमान्य व्यवस्था बनानी है जिससे मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने के लिए सुरक्षित स्थान भी मिल सके और क्षेत्र की कानून व शांति व्यवस्था पर भी कोई आंच न आए. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आम जनता के आवागमन और यातायात में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए.
इस संबंध में धार के जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा, "चूंकि न्यायालय का आदेश हाल ही में प्राप्त हुआ है, इसलिए हमारी प्रशासनिक टीम सभी कानूनी पहलुओं और दिशा-निर्देशों का बारीकी से अध्ययन कर रही है. उसी के अनुरूप सभी पक्षों से संवाद कर शांतिपूर्ण ढंग से आगे का निर्णय लिया जाएगा."
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