बुरहानपुर में कोटवारों का नया अवतार: अब खाकी वर्दी में पुलिस के साथ संभालेंगे लॉ एंड ऑर्डर, शुरू हुआ स्पेशल ट्रेनिंग कैंप
बुरहानपुर में कोटवारों को अब खाकी वर्दी। पुलिस की तरह कानून-व्यवस्था संभालने के लिए 250 कोटवारों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण।
बुरहानपुर। अभी तक गांवों में नीली वर्दी में नजर आने वाले कोटवार अब एक नई भूमिका में दिखेंगे। बुरहानपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में कोटवारों को अब खाकी वर्दी दी गई है, ताकि वे 'लॉ एंड ऑर्डर' बनाए रखने में पुलिस के साथ कदमताल कर सकें। इसके लिए बुरहानपुर की रेणुका पुलिस लाइन में जिले के 250 कोटवारों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
⚔️ पुलिस लाइन में मिल रही हाईटेक ट्रेनिंग
पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी ने बताया कि कोटवारों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से रूबरू कराने के लिए यह नवाचार किया गया है। विशेष ट्रेनर्स के माध्यम से उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और आधुनिक तकनीक व डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य त्योहारों और विशेष आयोजनों के दौरान पुलिस की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
🤝 जनता और पुलिस के बीच बनेगा समन्वय
कोटवारों को सक्रिय करने से गांवों में अपराधों की रोकथाम में बड़ी मदद मिलेगी। किसी भी गांव में विवाद, चोरी या मारपीट जैसी घटनाओं की सबसे पहले जानकारी कोटवार को होती है। प्रशिक्षण के बाद, वे पुलिस के लिए 'आंख और कान' बनकर काम करेंगे और समय रहते सटीक सूचना प्रशासन तक पहुँचाएंगे। इससे पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और गांवों में सुरक्षा का दायरा और अधिक मजबूत होगा।
💰 कोटवारों का वेतन ढांचा
कोटवारों की आर्थिक स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में उन्हें उनकी भूमि के अनुसार मानदेय मिलता है:
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बिना भूमि वाले कोटवार: ₹8,000 प्रति माह (हर साल ₹500 की वृद्धि)।
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3 एकड़ तक भूमि वाले: ₹2,000 प्रति माह।
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3 से 7.5 एकड़ भूमि वाले: ₹1,200 प्रति माह।
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7.5 से 10 एकड़ भूमि वाले: ₹1,000 प्रति माह।
प्रशासन की इस पहल से न केवल कोटवारों का मान बढ़ा है, बल्कि वे अब गांव स्तर पर सरकार की योजनाओं और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक तरीके से लागू करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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