सीधी में बड़ा महाघोटाला! एक ही कर्मचारी कई विभागों से एक साथ उठा रहा मानदेय, महीने में दिखाए 32 दिन काम
सीधी जिले में सरकारी खजाने में सेंधमारी का बड़ा मामला सामने आया है, जहां कई कर्मचारी एक साथ कई विभागों से मानदेय ले रहे हैं। एक ने तो महीने में 32 दिन का काम दिखा दिया। मामले की जांच शुरू हो गई है।
सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सरकारी खजाने पर सामूहिक रूप से डाका डालने का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है. यहाँ नियम-कानूनों को ताक पर रखकर एक ही व्यक्ति एक ही समय में कई शासकीय विभागों में फुल-टाइम नौकरी कर रहा है और हर जगह से एक साथ नियमित मानदेय (Salary) उठा रहा है. इस पूरे गड़बड़झाले की शिकायत एक सतर्क शिकायतकर्ता द्वारा जिला मुख्यालय से लेकर सीधे राजधानी भोपाल तक दर्ज कराई गई है. शुरुआती इनपुट्स के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और जिला पंचायत की सोशल ऑडिट शाखा में ऐसे एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ पुख्ता शिकायतें मिली हैं, जिससे दोनों विभागों में भारी हड़कंप मच गया है.
🚨 2. एक ही समय पर दो जगह ड्यूटी: एक महीने में 32 दिन का कार्य दिवस दिखाकर लिया भुगतान
शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, जिला पंचायत के तहत आने वाले सोशल ऑडिट में 'ब्लॉक सोशल ऑडिटर' (BSA) का पद और एनआरएलएम (NRLM) में 'सीआरपी व मास्टर ट्रेनर' का पद पूर्णकालिक (Full-time) श्रेणी के हैं. दोनों ही कार्यालयों में काम करने का आधिकारिक समय एक ही है, इसके बावजूद एक ही व्यक्ति दोनों जगह कागजों पर शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करा रहा है.
सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि एक शातिर कर्मचारी ने तो एक महीने में 32 दिन का कार्य दिवस (Working Days) दिखाकर सरकारी खजाने से मानदेय आहरित कर लिया, जबकि कैलेंडर के किसी भी महीने में अधिकतम 31 ही दिन होते हैं.
📊 3. समझिए 32 दिन का गणित और विभागों में समानांतर नियुक्तियों का खेल
इस महाघोटाले में शामिल मुख्य विसंगतियों और एक ही कर्मचारी द्वारा एक माह में किए गए दावों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| विभाग / मिशन | आवंटित योजना / पद का नाम | एक ही माह में दर्शाए गए कार्य दिवस |
| एनआरएलएम (NRLM) | 'एक बगिया मां के नाम' योजना | 20 दिन |
| एनआरएलएम (NRLM) | 'कृषि सखी' परियोजना | 10 दिन |
| एनआरएलएम (NRLM) | 'किसान पाठशाला' ट्रेनर | 02 दिन |
| कुल दावा (सिर्फ एक विभाग में) | असंभव कार्य दिवस का आंकड़ा | 32 दिन |
| समानान्तर अन्य विभाग | अतिथि शिक्षक (शिक्षा विभाग), स्वास्थ्य विभाग, 'प्रदान' एनजीओ और सोशल ऑडिट (BSA पद) | इन सभी जगहों पर भी उसी अवधि में मानदेय उठाया गया. |
🚩 4. भाजपा की दो महिला पदाधिकारियों पर भी गंभीर आरोप: उर्मिला साकेत और अनीता गुप्ता का नाम आया सामने
इस भ्रष्टाचार के तार स्थानीय राजनीति से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं. मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दो प्रमुख महिला पदाधिकारियों के नाम भी आधिकारिक शिकायत में दर्ज हैं. इसमें जिला भाजपा मंत्री उर्मिला साकेत और बरमबाबा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष व चौफाल मंडल उपाध्यक्ष अनीता गुप्ता का नाम प्रमुखता से शामिल है. आरोप है कि ये दोनों नेत्री भी प्रभाव का इस्तेमाल कर एनआरएलएम और जिला पंचायत की सोशल ऑडिट शाखा दोनों ही जगहों से एक साथ नियमित मानदेय प्राप्त कर रही हैं.
🆔 5. एक महिला और दो अलग-अलग नाम: फर्जी दस्तावेजों के सहारे चल रहा था बड़ा खेल
शिकायत में एक और अत्यंत संगीन आरोप लगाया गया है कि एनआरएलएम और जिला पंचायत की बीएसए (BSA) शाखा में एक ही महिला दो अलग-अलग नामों से सक्रिय रूप से नौकरी कर रही है. चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ही स्थानों पर उसकी पहचान और शैक्षणिक दस्तावेज भी पूरी तरह अलग-अलग हैं. यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो पहचान छिपाने और कूट रचित (Forged) दस्तावेज तैयार करने के आरोप में संबंधित महिला व उसे संरक्षण देने वालों पर सीधे आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज होना तय है.
💼 6. जांच के घेरे में विभाग: एडिशनल सीईओ धनंजय मिश्रा को सौंपी गई उच्च स्तरीय जांच
मामला भोपाल तक पहुंचने के बाद जिला पंचायत के पूर्व सोशल ऑडिट प्रभारी अब बैकफुट पर हैं और अपने बचाव में जुट गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, वे आनन-फानन में वर्तमान बीएसए से इस बात का प्रमाण पत्र मांग रहे हैं कि संबंधित कर्मचारी सिर्फ एक ही जगह कार्य कर मानदेय ले रहा है, ताकि पुरानी फाइलों को दुरुस्त किया जा सके.
इस पूरे गंभीर विषय पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने कड़ी कार्रवाई के संकेत देते हुए कहा:
वहीं, एनआरएलएम के जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) पुष्पेंद्र सिंह ने भी पुष्टि की है कि पूरे मामले के रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं और अतिरिक्त सीईओ द्वारा संयुक्त जांच की जा रही है. जांच अधिकारी धनंजय मिश्रा के अनुसार, जांच शुरू कर दी गई है और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो दोषी कर्मचारियों से अवैध रूप से लिए गए मानदेय की शत-प्रतिशत वसूली की जाएगी और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाएगा.
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