शिवपुरी प्रशासन की भावुक अपील; नवजात को झाड़ियों में न फेंकें, 'शिशु स्वागत केंद्र' को सौंपें

शिवपुरी जिला प्रशासन ने नवजात बच्चों को कचरे में फेंकने वालों से पूरी गोपनीयता के साथ सुरक्षित सरेंडर करने की अपील की है। सुनसान राहों में बच्चा छोड़ना अब 7 साल की जेल वाला गंभीर अपराध है।

Jul 20, 2026 - 10:19
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शिवपुरी प्रशासन की भावुक अपील; नवजात को झाड़ियों में न फेंकें, 'शिशु स्वागत केंद्र' को सौंपें

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में लगातार नवजात बच्चों को झाड़ियों में फेंकने और लावारिस हालत में कुत्तों द्वारा उनके शवों को नुकसान पहुंचाने की हृदयविदारक घटनाएं सामने आ रही हैं। इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और बाल संरक्षण विभाग ने समाज और मजबूर माता-पिता से एक बेहद भावुक और वैधानिक अपील जारी की है। प्रशासन ने कहा है कि, "जिसे आप लोक-लाज या सामाजिक दबाव के कारण बोझ समझकर सुनसान रास्तों पर छोड़ आते हैं, वही मासूम बच्चा किसी सूने आंगन की किलकारी और बुढ़ापे का सहारा बन सकता है।"

❤️ 1. सूने आंगन की किलकारी बन सकता है बच्चा: पोहरी की घटना बनी सबसे बड़ी मिसाल

प्रशासन की इस अपील का सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण हाल ही में पोहरी क्षेत्र में देखने को मिला, जहां 30 जून को झाड़ियों में एक नवजात शिशु लावारिस हालत में मिला था। उस एक बेसहारा बच्चे को कानूनी रूप से अपनाने और उसे नया जीवन देने के लिए शिवपुरी सहित आसपास के कई जिलों के 50 से अधिक निःसंतान दंपतियों ने बाल कल्याण समिति (CWC) का दरवाजा खटखटाया है। यह भावुक आंकड़ा साफ तौर पर बयां करता है कि समाज में आज भी संतान सुख के लिए कितनी आंखें तरस रही हैं, इसलिए बच्चों को मौत के मुंह में धकेलने के बजाय उन्हें सुरक्षित हाथों में सौंपना चाहिए।

📊 2. सुरक्षित शिशु समर्पण गाइडलाइन और कानूनी प्रावधान: एक नजर में

यदि कोई परिवार चरम परिस्थितियों में बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ है, तो वह नीचे दिए गए सुरक्षित माध्यमों और कानूनों के तहत कदम उठा सकता है:

सुरक्षित संपर्क केंद्र व माध्यम आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर कानूनी धाराएं एवं सजा के प्रावधान (लावारिस छोड़ने पर)
आंगनवाड़ी दीदी / आशा कार्यकर्ता सीधे स्थानीय स्तर पर संपर्क करें किशोर न्याय अधिनियम 2015 (धारा 75): शासकीय कार्य की अवहेलना व क्रूरता।
नजदीकी प्रसव केंद्र / शिशु स्वागत केंद्र बिना किसी पूछताछ के सुरक्षित समर्पण भारतीय न्याय संहिता 2023 (धारा 93): बच्चे को असुरक्षित छोड़ना।
जिला अस्पताल / मंगलम बालगृह पालना गृह पूर्ण गोपनीयता के साथ पालना गृह में रखें सजा का प्रावधान: 7 साल तक की जेल और ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) तक का भारी जुर्माना।
राष्ट्रीय बाल हेल्पलाइन चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098 (Toll-Free) विशेष परिस्थिति: स्थिति गंभीर या मौत होने पर 'हत्या के प्रयास' (Attempt to Murder) की धारा।
📞 3. डरें नहीं, इन जिम्मेदार माध्यमों से सीधे करें संपर्क; पहचान रहेगी पूरी तरह गुप्त

जिला बाल संरक्षण अधिकारी के अनुसार, अनचाहे गर्भ या किसी अन्य मजबूरी में फंसे लोग डरें नहीं। वे अपने गांव या वार्ड की आंगनवाड़ी दीदी, आशा कार्यकर्ता, नजदीकी शासकीय प्रसव केंद्र, बाल विकास परियोजना कार्यालय (CDPO), जिला अस्पताल या मंगलम बालगृह में स्थापित पालना गृह में जाकर सुरक्षित रूप से बच्चे का समर्पण (Surrender) कर सकते हैं। इसके अलावा, कोई भी व्यक्ति सीधे राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल करके बच्चे को सुरक्षित हाथों में सौंप सकता है।

🔒 4. 60 दिनों का समय और पूर्ण गोपनीयता: सरकारी अस्पताल अब बने 'शिशु स्वागत केंद्र'

विभागीय नियमों के अनुसार, यदि मजबूरी में बच्चे का समर्पण करने के बाद माता-पिता का मन बदल जाता है, तो कानून उन्हें सुधरने का पूरा मौका देता है। वे 60 दिनों (2 महीने) के भीतर कानूनी आवेदन प्रस्तुत कर अपने बच्चे को वापस पा सकते हैं। इस निर्धारित 60 दिन की अवधि बीत जाने के बाद ही बच्चे को कानूनी रूप से गोद (Adoption) देने के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाता है।

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