छतरपुर-पन्ना के विस्थापितों को कब मिलेगा न्याय? CM मोहन यादव बोले- 1 महीने में करेंगे निराकरण
मध्य प्रदेश विधानसभा में केन बेतवा परियोजना के विस्थापन और मुआवजे में करोड़ों के घोटाले का मुद्दा उठा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 महीने के भीतर जांच कराने का आश्वासन दिया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत छतरपुर और पन्ना जिले में प्रभावित परिवारों के मुआवजे और भूमि अधिग्रहण को लेकर हुई धांधली की सरकार विस्तृत जांच कराएगी. विधानसभा के प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और विस्थापितों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने का आश्वासन दिया है.
मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि, "इस पूरे मामले की जांच 1 महीने के भीतर कराकर न्यायोचित निराकरण कर दिया जाएगा. सरकार नहीं चाहती कि इस परियोजना से किसी भी स्थानीय व्यक्ति या ग्रामीण को कोई कष्ट हो."
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना के तहत छतरपुर एवं पन्ना जिले के विस्थापित परिवारों और प्रभावितों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा व पुनर्वास पैकेज की राशि न दिए जाने का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में तीन स्पष्ट सवाल पूछे थे, जिनका पृथक जवाब आना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक गांव में जहां एक भी मुस्लिम परिवार निवास नहीं करता, वहां 8 फर्जी लोगों के नाम पर मुआवजा बांट दिया गया.
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से विधानसभा की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाकर मामले की जांच कराने की मांग की. उन्होंने सदन के सामने कई गंभीर तथ्य रखते हुए कहा:
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613 पात्र परिवार वंचित: आखिर 613 पात्र परिवार मुआवजे की सूची से बाहर कैसे हो गए?
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फर्जी दस्तावेज और अंगूठे: एक ऐसे व्यक्ति के अंगूठे के निशान दस्तावेजों पर लगाए गए जो उस समय गांव का सरपंच ही नहीं था.
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नाकाफी मुआवजा: पुनर्वास के नाम पर कुछ प्रभावितों को महज ₹1,200 दिए गए. इतने कम पैसों में कोई अपना घर कैसे बना सकता है?
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फर्जी विस्थापन: जो लोग कभी गांव में रहे ही नहीं, उन्हें पुनर्वास पैकेज के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि बांट दी गई.
सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए प्रभावित परिवारों और गांवों के आंकड़े नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:
| जिला | विस्थापित/प्रभावित गांव | विस्थापित/प्रभावित परिवार | वर्तमान स्थिति (सरकारी पक्ष) |
| पन्ना | 7 गांव (विस्थापन) + 8 गांव (अधिग्रहण) | 1,321 परिवार (विस्थापित) + 644 खातेदार (प्रभावित) | पात्रों को मुआवजा वितरित, ~10 मामले लंबित |
| छतरपुर | 14 गांव | 3,718 परिवार | अधिकांश पात्रों को भुगतान का दावा |
नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि छतरपुर और पन्ना जिले के अधिकांश पात्र विस्थापितों और प्रभावित खातेदारों को मुआवजा राशि पहले ही बांटी जा चुकी है.
मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल 10 के लगभग ऐसे मामले शेष रह गए हैं जिन्हें तकनीकी कारणों से मुआवजा नहीं मिल सका है. यदि इसके अलावा भी कोई पात्र परिवार छूट गया है, तो संबंधित जिला कलेक्टर्स को तुरंत निर्देश जारी कर जांच करा ली जाएगी.
मंत्री के जवाब के बाद नेता प्रतिपक्ष ने संसदीय समिति से जांच कराने की पुनः मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद कमान संभालते हुए सदन को आश्वस्त किया.
मुख्यमंत्री के इस ठोस आश्वासन के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि केन-बेतवा लिंक परियोजना के पुनर्वास पर लंबे समय से काम चल रहा है और मुख्यमंत्री ने स्वयं 1 महीने में जांच का भरोसा दिया है, इसलिए अब इस विषय पर संतोष व्यक्त किया जाना चाहिए.
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