कोर्ट में लेडी ऑफ जस्टिस की जगह लगे देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा; इंदौर अभिभाषक संघ की मांग
इंदौर अभिभाषक संघ ने न्यायालयों में 'लेडी ऑफ जस्टिस' की जगह न्यायप्रिय शासिका देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा लगाने और रीगल चौराहे का नाम 'अधिवक्ता चौराहा' करने की मांग की है। प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर को ज्ञापन सौंपा।
इंदौर। इंदौर अभिभाषक संघ ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए न्यायालय परिसर में 'लेडी ऑफ जस्टिस' (Lady of Justice) की प्रतिमा के स्थान पर मालवा की न्यायप्रिय एवं लोककल्याणकारी शासिका देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित करने की पुरजोर मांग उठाई है. इसके साथ ही संघ ने शहर के प्रसिद्ध रीगल चौराहे का नाम बदलकर 'अधिवक्ता चौराहा' किए जाने का प्रस्ताव भी शासन-प्रशासन के समक्ष रखा है.
अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राकेश पाल के नेतृत्व में पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर से मुलाकात कर उन्हें इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा.
प्रशासनिक न्यायमूर्ति को दिए गए ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि अदालतों में स्थापित 'लेडी ऑफ जस्टिस' की प्रतिमा औपनिवेशिक (ब्रिटिश) मानसिकता का प्रतीक है. इसके स्थान पर प्रात: स्मरणीय देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए.
अधिवक्ताओं का कहना है कि देवी अहिल्याबाई का शासनकाल पूरे देश में निष्पक्ष न्याय, सुशासन और जनसेवा के लिए जाना जाता है. उन्होंने अपने शासनकाल में बिना किसी पक्षपात के समाज के प्रत्येक वर्ग को न्याय दिया और देशभर में धार्मिक व सामाजिक निर्माण कार्य कराए. इसलिए कोर्ट में उनकी प्रतिमा स्थापित करना देश के सांस्कृतिक गौरव और न्यायप्रियता का प्रतीक होगा.
ज्ञापन में रीगल चौराहे का नाम बदलकर 'अधिवक्ता चौराहा' करने की मांग के साथ-साथ वकीलों और आम पक्षकारों से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है.
अभिभाषक संघ ने बताया कि चेक बाउंस (Section 138 NI Act) से जुड़े प्रकरणों की जटिलताओं के कारण वकीलों को काफी प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा जिला न्यायालय और परिवार न्यायालय (Family Court) की मूलभूत कार्यप्रणाली तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार की मांग की गई.
ज्ञापन में शामिल प्रमुख बिंदुओं का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| क्र. | मुख्य मांग / मुद्दा | प्रशासनिक तर्क व पृष्ठभूमि |
| 1 | 'लेडी ऑफ जस्टिस' की जगह देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा | औपनिवेशिक प्रतीक हटाकर भारतीय सांस्कृतिक व न्यायप्रिय प्रतीक की स्थापना. |
| 2 | रीगल चौराहे का नाम परिवर्तन | नया नाम 'अधिवक्ता चौराहा' रखे जाने का प्रस्ताव. |
| 3 | चेक बाउंस प्रकरणों में सुधार | अधिवक्ताओं को आ रही व्यावहारिक व प्रक्रियात्मक समस्याओं का निराकरण. |
| 4 | जिला व परिवार न्यायालय में व्यवस्था सुधार | प्रशासनिक व मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने की मांग. |
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